मुरादाबाद। जिले के हस्तशिल्प निर्यातकों के सामने इन दिनों शिपिंग संकट गंभीर चुनौती बन गया है। मुंद्रा और न्हावा शेवा बंदरगाहों पर कंटेनरों का दबाव बढ़ने से मुरादाबाद के करीब 350 कंटेनर फंस गए हैं। स्थिति यह है कि निर्यातकों को जहाज (शिप) मिलने के लिए करीब 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। निर्यातकों का कहना है कि कंटेनर बंदरगाहों पर खड़े हैं, लेकिन अभी तक उन्हें जहाज में लोड नहीं किया जा सका है। इससे निर्यात, उत्पादन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
लासा लॉजिस्टिक आईएनसी के निदेशक अनुराग थापन ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बदलाव का सीधा असर शिपिंग व्यवस्था पर पड़ा है। अधिक फ्रेट(किराया) मिलने के कारण कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाज चीन और अमेरिका के रूट पर लगा दिए हैं, जिससे भारत के लिए जहाजों की उपलब्धता कम हो गई है। पहले जिन कंटेनरों को तय समय पर जहाज मिल जाता था, अब उन्हें लोड होने के लिए करीब एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिले के करीब 350 कंटेनर वर्तमान में मुंद्रा और न्हावा शेवा बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। इससे विदेशी खरीदारों को तय समय पर माल भेजना मुश्किल हो गया है और नए ऑर्डरों की योजना भी प्रभावित हो रही है।
निर्यातक विवेक अग्रवाल ने बताया कि यूरोप जाने वाले उत्पाद समय पर जहाज नहीं मिलने से पोर्ट पर ही रुके हुए हैं। मौजूदा हालात में शिप मिलने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। वहीं निर्यातक विशाल खन्ना ने बताया कि उनका कंटेनर 15 दिन से अधिक समय से बंदरगाह पर पड़ा है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उसे जहाज कब मिलेगा। निर्यातक रजत अग्रवाल ने बताया कि शिपमेंट में लगातार हो रही देरी से कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है और खरीदारों तक तय समय में उत्पाद पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।
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उत्पाद रुकने से भुगतान भी अटका
-आईआईए की एक्सपोर्ट-इंपोर्ट समिति के अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि लाल सागर संकट के कारण कई जहाज अब स्वेज नहर के बजाय केप ऑफ गुड होप मार्ग से होकर जा रहे हैं। इससे ट्रांजिट समय बढ़ गया है। वहीं मुंद्रा और न्हावा शेवा बंदरगाहों पर कंटेनरों की भीड़ के कारण निर्यातकों को करीब 30 दिन तक शिप का इंतजार करना पड़ रहा है। उत्पाद समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचने से भुगतान में भी देरी हो रही है, जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
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लकड़ी व कांच के उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित
-लासा लॉजिस्टिक आईएनसी के निदेशक अनुराग थापन ने बताया कि मुंद्रा और न्हावा शेवा बंदरगाहों पर फंसे कंटेनरों में सबसे अधिक स्टील बर्तन, कटलरी, यूटिलिटी आइटम्स और लकड़ी, पीतल व कांच से बने हस्तशिल्प उत्पाद हैं। इसके अलावा करीब 20 प्रतिशत कंटेनरों में लाइफस्टाइल एक्सेसरीज, फर्नीचर और फैशन ज्वेलरी उत्पाद है। उनका कहना है सबसे ज्यादा लकड़ी और कांच के उत्पाद प्रभावित होते हैं।