ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। एक वर्ष में 3325 लोगों को कुत्ते बिल्ली और बंदरों ने काटा है। इसमें सर्वाधिक संख्या 2282 कुत्तों, 576 बिल्ली और 473 बंदरों के काटने की घटनाएं हैं। इन सभी घायलों को इलाज के लिए नगर के सीएचसी पर लाया गया। जिन्हें निःशुल्क एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाकर उनका इलाज किया गया।
लोगों ने कुत्तों के काटने के बाद निजी चिकित्सालय में अपना इलाज कराया हो तो उनकी संख्या मिलाकर और भी अधिक हो सकती है। एक कुत्ते के काटने पर चार बार एंटी रैबीज इंजेक्शन लगता है। एक एंटी रैबीज इंजेक्शन बाजार में करीब 350 रुपए में मिलता है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश के बाद भी अभी कुत्तों के आतंक से मुक्ति दिलाने की कोई योजना यहां लागू नहीं हुई है। इस प्रकार 3325 लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने में करीब 11 लाख रुपये का खर्चा सरकार का हो गया होगा। क्षेत्र में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नगर में बड़ी संख्या में कुत्ते सड़कों पर घूमते हुए देखे जा सकते हैं।
एसडीएम प्रीति सिंह का कहना है कि यह मामला निकाय स्तर का है इसलिए इस मामले में नगर पालिका स्तर से ही कोई कार्रवाई होगी। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई योजना लागू नहीं है। एडीओ पंचायत योगेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें कोई आदेश कुत्तों को पकड़ने के बारे में होने की जानकारी नहीं है। पिछले दिनों नगर पालिका परिषद बोर्ड की बैठक में भी सभासदों ने यह मामला उठाया था लेकिन अभी तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।