मुरादाबाद। बुराई को नष्ट करने वाला त्योहार इस बार शुभ संयोग में मनाया जाएगा। होलिका दहन पर अमृत चौघड़िया रहेगी, जो आम लोगों के साथ व्यापारी वर्ग के लिए खास फलदायी रहेगी। इसके अलावा रंग खेलते वक्त भी लाभ, चाल और अमृत की चौघड़िया रहेंगी। पंड़ितों का कहना है कि यह होली समाज में खुशहाली और धनधान्य वाली रहेगी।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर के महंत पंडित केदार नाथ मिश्रा ने कहा कि लगभग सात वर्ष बाद देवगुरु बृहस्पति के उच्च प्रभाव में होली मनेगी। इससे मान-सम्मान और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होगी। होली उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में मनाई जाएगी। यह नक्षत्र सूर्य का है। सूर्य आत्म सम्मान, उन्नति और प्रकाश आदि का कारक है। इससे वर्ष भर सूर्य की कृपा मिलेगी। होलिका दहन इस बाद पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र में है। यह शुक्र का नक्षत्र है, जो जीवन में उत्सव, हर्ष, आमोद-प्रमोद और ऐश्वर्य का प्रतीक है। सुबह सुबह 10:45 से रात आठ 58 बजे तक भद्रा काल है। इस वक्त शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
लाइनपार माता मंदिर के महंत पंडित नवल अवस्थी ने बताया कि उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र चार बजकर 16 मिनट तक रहेगा। उसके बाद हस्त नक्षत्र लग जाएगा। दोपहर एक बजकर दस मिनट तक शूल योग रहेगा। उसके बाद वृद्धि योग लग जाएगा। रात नौ बजकर 54 मिनट से कन्या लग्न का चंद्रमा हो जाएगा। यह वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन राशि वाले जातकों के लिए धनदायक वृद्धि योग है। शुभ योग भद्रा को काट देते हैं। इसलिए रात आठ बजकर छह मिनट से नौ बजकर 35 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगी। उसके बाद नौ बजकर 35 मिनट से 11 बजकर पांच मिनट तक अमृत चौघड़िया रहेगी। जो व्यक्ति होली की लौ देखेगा उसे अमृत मिलेगा। यह सबसे बढ़िया है। मुख्य होलिका दहन इसी समय होगा। 21 मार्च को रंग की होली है। उस दिन वृद्धि योग और चंद्रमा कन्या का रहेगा। यह व्यापारियों के लिए अच्छा है। होली खेलने का समय सुबह छह बजकर 23 मिनट से आठ बजकर दो मिनट तक शुभ योग रहेगा। उसके बाद आठ बजकर दो मिनट से नौ बजकर 33 मिनट तक रोग की चौघड़िया रहेगी। यह 11 बजकर चार मिनट तक उद्वेग की चौघड़िया रहेगी। यह दोनों अशुभ हैं। उसके बाद 11 बजकर चार से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट और तीन बजकर 56 मिनट तक लाभ, चाल और अमृत की चौघड़िया रहेगी। फिर 15 बजकर 36 से 17 छह तक काल की चौघड़िया रहेगी, जो अशुभ है।