बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर विभाग से जुड़ी समस्याएं अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री हेल्प लाइन में दर्ज हुई शिकायतों तक की अनदेखी हो रही है। मुरादाबाद मंडल में 142 समस्याओं को सुनने के लिए अफसरों को टाइम ही नहीं मिला है। इनमें सर्वाधिक समस्याएं मुरादाबाद जिले की हैं। शासन ने शिक्षा विभाग के अफसरों को फटकार लगाते हुए समस्याओं का त्वरित निस्तारण कर आख्या रिपोर्ट तलब की है।
उत्तर प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री हेल्प लाइन शुरू की गई है। हेल्प लाइन में दर्ज होने वाली शिकायतों को इंटिग्रेडेट ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम (आईजीआरएस) एप के माध्यम से अधिकारियों के मोबाइल पर भेजा जाता है। शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग लेबल पर अधिकारी नामित और समस्याओं के निस्तारण की अवधि निर्धारित है। निर्धारित अवधि में शिकायतों की सुनवाई नहीं होने पर डिफाल्टर हो जाती हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक समस्याओं की सुनवाई के प्रति संजीदा नहीं हैं। जनवरी पहले सप्ताह तक जारी आंकड़ों में मुरादाबाद मंडल में 114 शिकायतें डिफाल्टर हो गई। इनकी सुनवाई में अफसरों ने रुचि ही नहीं दिखाई। जबकि 28 शिकायतें अभी तक लंबित चल रही हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो रामपुर जिले में चार शिकायतें लंबित और 22 डिफाल्टर हो चुकी हैं। इनमें 13 डिफाल्टर मामले बीएसए के स्तर पर हैं। संभल जिले में चार शिकायतें लंबित और 25 डिफाल्टर हैं। 15 मामले खंड शिक्षा अधिकारी और 10 मामले बीएसए स्तर पर हैं।
बिजनौर जिले में सात लंबित और 22 शिकायतें डिफाल्टर हो गई हैं। इनमें मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक स्तर पर चार मामले हैं। अमरोहा जिले में आठ लंबित और 13 डिफाल्टर शिकायतें हैं। मुरादाबाद जिले में पांच लंबित और 32 डिफाल्टर शिकायतें हैं। 12 शिकायतें खंड शिक्षा अधिकारी, 17 बीएसए और तीन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक स्तर पर डिफाल्टर हुई हैं। शिकायतों के प्रति अफसरों के गंभीरता नहीं दिखाने पर बालिका शिक्षा की यूनिट इंचार्ज कमलाकर पांडेय ने अफसरों को फटकार लगाई है। उन्होंने अफसरों से शिकायतों का तत्काल निरस्तारण कर बेसिक शिक्षा निदेशालय एवं राज्य परियोजना कार्यालय को आख्या रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।