सीवर लाइन के नाम पर शहर की पब्लिक के साथ धोखा हो रहा है। जल निगम और एलएंडटी कंपनी कालोनियों में जो सीवर लाइन बिछा रही है, उसमें महज चार से छह इंच चौड़े पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीवर में इतने संकरे पाइप पर निगम और जलकल विभाग ने भी विरोध दर्ज कराया है। बावजूद इसके जल निगम शहर की सभी कालोनियों में इसी पाइप का इस्तेमाल कर रहा है। जलकल अफसरों का तर्क है कि चार इंच से ज्यादा चौड़ा पाइप तो लोग अपने घरों में इस्तेमाल करते हैं।
कालोनियों में जल निगम जो चार से छह इंच तक चौड़ाई के पाइप बिछा रहा है वह 200 - 250 परिवारों के सीवर के लिए बिछाया जा रहा है। चार इंच चौड़े पाइप में इतने परिवारों का सीवर कैसे बहेगा, इस पर जल निगम अधिकारी तकनीकि और मानकों का हवाला दे रहे हैं। आने वाले दिनों में कालोनियों में परिवाराें की संख्या बढ़ेगी। इन हालात में यह सीवर लाइन कितना काम कर पाएगी, यह भविष्य में ही पता चलेगा। नगर निगम ने आशंका जाहिर की है कि पाइप की मोटाई मौजूदा जरूरतों के हिसाब से भी बेहद कम है। ऐसे में सीवर लाइन शुरू होने से पहले ही दम तोड़ सकती है।
मानक के मुताबिक डाल रहे हैं पाइप: पीओ
मुरादाबाद। सीवर लाइन प्रोजेक्ट के परियोजना निदेशक महेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि सीवर लाइन मानकों के मुताबिक ही डाली जा रही है। चार इंच के प्लास्टिक पाइप का इस्तेमाल घरों में कनेक्शन देने के लिए किया जा रहा है। कालोनियों की मुख्य लाइन में करीब छह इंच मोटा प्लास्टिक पाइप डाला जा रहा है। सीवर लाइन के लिए यही मानक हैं। सीवर लाइन में कहीं कोई कमी नहीं आएगी।
बर्बाद हो जाएगा सीवर, करेंगे शिकायत: महापौर
मुरादाबाद। महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि जल निगम और एलएंडटी द्वारा कालोलियों की सीवर लाइन में डाले जा रहे चार और छह इंच के प्लास्टिक पाइप का विरोध उन्हाेंने पहले भी किया था। मेयर का कहना है कि इतने संकरे पाइप में कालोनियों का सीवर नहीं चल सकता। करोड़ों रुपये बर्बाद करने के बाद भी सीवर कामयाब नहीं होगा। लोग अपने अकेले घर के लिए भी कम से कम छह से आठ इंच तक के पाइप का इस्तेमाल करते हैं। जल निगम को पहले भी पत्र भेजा गया था। लेकिन जल निगम और एलएंडटी ने इसकी अनदेखी की। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी।
जल निगम ने नहीं ली कोई सलाह: जीएम
मुरादाबाद। जीएम जलकल एसके श्रीवास्तव का कहना है कि जल निगम अपने मानकों के अनुसार कार्य कर रहा है। इसमें हमारी सलाह नहीं ली गई। मेरे अनुसार चार - छह इंच का पाइप बहुत छोटा है। इतने संकरे पाइप में सीवर कैसे बहेगा, यह जल निगम ही बता सकता है। सीवर लाइन को दो - चार साल के लिए नहीं बल्कि आगामी 50-60 साल के दृष्टिगत डाला जाता है। बढ़ती आबादी का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।
कंपनी नहीं जल निगम खुद बिछा रहा लाइन: सिंह
मुरादाबाद। एलएंडटी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके सिंह का कहना है कि कालोनियों में डाली जा रही सीवर लाइन से कंपनी का कोई मतलब नहीं है। कंपनी केवल मुख्य सीवर लाइन बिछा रही है। कालोनियों में सीवर लाइन बिछाने का काम जल निगम खुद कर रहा है।