प्रदेश सरकार के प्रतिबंध और एस्मा लागू होने के बावजूद लेखपाल बुधवार को हड़ताल पर रहे। लेखपालों ने आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र समेत सभी कार्य ठप्प कर दिए हैं। लेखपाल संघ ने तहसीलों पर धरना प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस बीच देर शाम लखनऊ में लेखपाल संघ के पदाधिकारियों की प्रमुख सचिव से हुई वार्ता विफल हो गई है। प्रशासन ने गुरुवार को लेखपालों की हड़ताल पर सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं।
सुबह से ही तहसील परिसर में धरने पर बैठे लेखपालों ने कहा कि वह मांगे पूरी होने तक हड़ताल खत्म नहीं करेेंगे। सरकार चाहे तो जेल में डाल दे। लेखपाल वेतन उच्चीकरण, वेतन और पेंशन विसंगति दूर करने, भत्तों में वृद्धि करने, लैपटॉप- स्मार्टफोन दिलाने और राजस्व उपनिरीक्षक सेवा नियमावली 2017 को कैबिनेट से पास कराने समेत आठ मांगों पर अड़े हैं। लेखपालों की हड़ताल की वजह से आय जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील पहुंचे तमाम आवेदक भटकते रहे। स्कूल - कालेजों में दाखिले का समय होने की वजह से इस समय छात्र - छात्राओं को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों की जरूरत है। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठी का कहना है कि किसी मांगें पूरी होने तक लेखपाल कोई काम नहीं करेंगे। धरना - प्रदर्शन में गजेंद्र सिंह, तस्लीम अहमद, देशराज सिंह, नैपाल सिंह, मुनीष कुमार आदि मौजूद रहे।
लखनऊ में वार्ता विफल होने के बाद प्रशासन ने हड़ताली लेखपालों पर सख्ती की तैयारी शुरू कर दी। गुरुवार को हड़ताल पर रहने वाले लेखपालों के खिलाफ प्रशासन एस्मा के तहत कार्रवाई कर सकता है।
हड़ताल पर मंडलायुक्त ने टिकाईं नजरें
मुरादाबाद। लेखपालों की हड़ताल पर नवागत मंडलायुक्त अनिल राजकुमार ने भी नजरें टिका दी हैं। कमिश्नर ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि हड़ताल पर सतर्क दृष्टि रखें और ताजा हालात से अवगत कराते रहें। उन्हाेंने शासन को भी मंडल में लेखपाल हड़ताल की ताजा स्थिति से अवगत कराया है। मंडलायुक्त का कहना है कि लेखपाल नियमों की अवहेलना न करें। दाखिलों का समय होने की वजह से आय, निवास और जाति प्रमाण पत्रों की छात्र - छात्राओं को अत्यंत आवश्यकता है। इन्हें बिना किसी रुकावट के जारी किया जाए।