मुरादाबाद। यह लापरवाही की इंतहा है। शहर की सड़कों और गलियों में सीवर लाइन तो बिछाई मगर मैनहोल पर ढक्कन बेतरतीब ढंग से लगा दिए। कहीं ये सड़क से दस इंच ऊपर हैं तो कहीं सड़क से नीचे। शहर की 16 सड़कों पर 15.2 किमी में ऐसे 284 मैनहोल हैं जो लोगों को जीवन भर का दर्द दे सकते हैं। इनसे हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है।
शहर में करीब दस साल से सीवर पाइप लाइन डालने का काम चल रहा है। शहर के अधिकांश इलाकों में काम पूरा हो चुका है। बीच सड़क या किनारों पर खुदाई कर सीवर लाइन डाली जा रही है। कई मोहल्लों मे सीवर लाइन डालने के बाद गड्ढे छोड़ दिए गए है या फिर भरे गए गड्ढे बारिश में धंस गए हैं। भविष्य में सीवर की सफाई के लिए जगह-जगह मैनहोल बनाए गए हैं। इन मैनहोलों पर मनमानी ढंग से ढक्कन लगाए हैं। कहीं मैनहोल सड़क से दस इंच से अधिक ऊपर हैं तो कहीं नीचे हैं। यहीं नहीं कई स्थानों पर ढक्कन पर लगीं लोहे की चादरें बाहर निकले हुए हैं, जिन पर से बाइकें और कारें निकलती हैं तो कभी भी हादसा हो सकता है। मनमाने और बेतरतीब ढंग से लगाए गए सीवर लाइन के मैनहोल के ढक्कन बाइक और कार सवारों को झटके दे रहे हैं। रोजाना इन सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों को ये ढक्कन दर्द बांट रहे हैं। इन सड़कों से गुजरने वाले जिम्मेदार भी आंख मूंदे हुए हैं। अमर उजाला टीम ने मुख्य मार्गों पर इसकी पड़ताल की।
नागफनी थाने से बंगला गांव चौकी तक सबसे अधिक ढक्कन
मुरादाबाद। नागफनी थाने से बंगला गांव पुलिस तक सीवर के मैनहोल सबसे अधिक दिखे। करीब एक किमी की दूरी पर 37 मैनहोल पर हैं। जिस पर बेतरतीब ढंग से ढक्कन लगाए गए हैं।
झटकों से ये रही है परेशानी
- रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से में झटका लगता है, ठीक होने में एक से डेढ़ महीने का वक्त लग सकता है
- झटके से बुजुर्गों की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आ रहे हैं
- डिस्क पीड़ितों के दर्द दोबारा उठ रहे हैं
- झटके से बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं
- गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है
- बाइक या कार चलाते समय शरीर में अचानक झटके लगने से सबसे अधिक असर रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है। इससे रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा प्रभावित होता है। सत्तर साल या इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में कैल्शियम की कमी होती है। झटका लगने पर उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आ सकता है। - डा. विनय गुप्ता, हड्डी रोग विशेषज्ञ
किस रोड पर कितने मैन होल
कहां से कहां तक----------दूरी--------मैनहोल
सिविल लाइंस चौक से पीएचसी तिराहा- 2000 मी-03
डिप्टीगंज से चक्कर की मिलक- 1900 मी------35
फव्वारा से खरे चौराहा------ - 1900 मी------33
प्रिंस रोड मोड़ से गलशहीद---- 1100 किमी--13
नागफनी से बंगला गांव------- 1000 मी--37
गुरहट्टी से आंबेडकर पार्क----1000 मी--16
ताड़ीखाना से बुधबाजार चौक----900 मी--13
गुरहट्टी से डिप्टीगंज---------800 मी---15
मंडी चौक से दीवान का बाजार---800 मी--09
डिप्टीगंज से महिला थाना------800 मी---20
लोको शेड पुल से कपूर कंपनी---900 मी--13
कपूर कंपनी से ताड़ीखाना------500 मी--08
गुरहट्टी से ताड़ीखाना--------600 मी--12
ताड़ीखाना से पारकर रोड-------600 मी--12
गलशहीद से मंडी चौक-------600 मी--21
दीवान का बाजार से नागफनी ---500 मी--24
शहर में सीवर लाइन डालने के बाद मैनहोल पर ढक्कन लगाया जाता है। खुदाई के बाद सड़क बनाते समय ढक्कन लेवल का ख्याल रखा जाता है। इसके बाद भी अगर किसी स्थान पर ढक्कन के सड़क से ऊपर नीचे होने की शिकायत मिलती है तो टीम भेजकर उसे ठीक कराया जाता है। - संजय कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, एलएनटी