एमडीए में 26 करोड़ रुपये का टेंडर फर्जीवाड़ा सामने आया है। केंद्र सरकार के अनुदान से नया मुरादाबाद में दस्तकारों के लिए बनाए जा रहे सोर्सिंग हब एवं वेेयर हाउस का टेंडर एमडीए अधिकारियों ने वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी को फर्जी कागजों की बुनियाद पर दिया था। मुख्यमंत्री से हुई शिकायत के बाद मामले पर जांच बैठी तोे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।
लेकिन कंपनी का मालिक मौजूदा सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद का नजदीकी रिश्तेदार है लिहाजा प्राधिकरण अफसर मामले में लीपापोती की कोशिशों में जुटे हैं। फर्जीवाड़े में तत्कालीन वीसी सीएल शेखर समेत एमडीए के कई अधिकारियों की भी गर्दनें फंस रही हैं। मुरादाबाद प्राधिकरण में यह फर्जीवाड़ा मार्च 2009 में तत्कालीन वीसी सीएल शेखर के कार्यकाल में हुआ था।
नया मुरादाबाद सेक्टर चार में एमडीए को दस्तकारों के लिए सोर्सिंग हब एंड वेेयर हाउस बनाना था। जिसके लिए केंद्र सरकार ने भी आठ करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। टेंडर के लिए शर्त थी कि वही ठेकेदार/ कंपनी टेंडर के लिए पात्र हैं जिन्हें एक मुश्त 17.45 करोड़ का कोई काम करने का अनुभव हो। उक्त कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार नसीम अख्तर की कंपनी वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग ने भी इसके लिए 10 फरवरी 2009 को और 22 फरवरी 2009 को टेंडर डाला।
लेकिन दोनों बार पर्याप्त अनुभव न होने की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया। लेकिन दो मार्च 2009 को आश्चर्यजनक ढंग से वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी को ही सोर्सिंग हब का 26 करोड़ का टेंडर दे दिया गया। अब शासन के आदेश पर हुई जांच में खुलासा हुआ है कि वीआर कंस्ट्रक्शन एंड इंजीनियरिंग कंपनी ने टेंडर हथियाने के लिए प्राधिकरण अफसरों की मिलीभगत से अनुभव के फर्जी कागज लगाए थे।
जिस कंपनी ने अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया वह फर्जी निकली। ठेकेदार ने 18 करोड़ रुपये की लागत से काशी विश्वनाथ स्टील फैक्ट्री बनाने का दावा किया था। लेकिन 27 जनवरी को काशी विश्वनाथ स्टील प्राइवेट लिमिटेड के एमडीए देवेंद्र कुमार अग्रवाल ने एमडीए को भेजे पत्र में वीआर कंस्ट्रक्शन के दावे को झूठा करार दिया है।
तत्कालीन वीसी सीएल शेखर ने बताया कि उन्होंने फाइल पर मौजूद तथ्यों के आधार पर ठेका दिया था। मौजूदा वीसी जेबी सिंह यादव का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद एक्शन लिया जाएगा। कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद का कहना है कि नसीम अख्तर उनके रिश्तेदार हैं लेकिन उनके कारोबार के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।