किसानों का करोड़ों रुपया दबाकर 25 चीनी मिलें बंद हो गईं हैं जबकि 15 ने बंदी का नोटिस विभाग को थमा दिया है। इन मिलों ने अपने सीजनल स्टाफ को भी पेडऑफ करना शुरू कर दिया है। लेकिन पेमेंट का कोई शेड्यूल विभाग को नहीं दिया है। कितना पेमेंट कब तक देंगे इसकी जानकारी गन्ना विभाग को नहीं दी गई है।
प्रदेश में 116 चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद की जा रही है। नवंबर से पेराई सत्र शुरू हो गया था। अब सीजन समाप्ति की तरफ है। गन्ना क्रय केंद्र तो अधिकांश मिलों ने समेटने शुरू कर दिए हैं। केवल मिल गेट पर ही गन्ना खरीद की जा रही है। पच्चीस चीनी मिलों ने तो अपना पेराई सत्र घोषित भी कर दिया है जबकि पंद्रह मिलों ने बंदी का नोटिस गन्ना विभाग को दे दिया है।
इन मिलों ने तर्क दिया है कि अब उनके क्षेत्र में गन्ना शेष नहीं रह गया है लिहाजा पेराई नहीं की जा सकती है। पंद्रह चीनी मिलों ने बंदी का नोटिस भी जारी कर दिया है। होना तो यह चाहिए था कि बंदी से पहले चीनी मिलों को बकाया पेमेंट के भुगतान का शेड्यूल गन्ना विभाग को दिया जाता। मगर ऐसा कहीं नहीं हुआ है।
पच्चीस चीनी मिलें बड़ी ही खामोशी के साथ बंद हो गईं हैं। जबकि इन चीनी मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है। प्रदेश की मिलों पर बकाया का आंकड़ा भी तीन हजार 532 करोड़ रुपये पहुंच गया है। अब शासन ने भी इन मिलों पर बकाया पेमेंट के भुगतान को दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि जो भी बकाया पेमेंट रह रहा है उसके लिए चीनी मिलों पर दबाव बनाया जाए। गन्ना प्रबंधकों से बात की जाए। पेमेंट का पूरा शेड्यूल लिया जाए। ताकि किसानों को उनका पैसा समय से दिलाया जा सके। किस मिल ने हफ्ते भर में कितना पेमेंट कर दिया है इसकी भी पूरी रिपोर्ट गन्ना मुख्यालय से मांगी जा रही है।