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फुहारों के बीच रथ पर निकली गजानन की सवारी

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मुरादाबाद।
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पिछले दस दिन से शहर में धूमधाम से मनाए जा रहे गणेश महोत्सव का रविवार को हर्षोल्लास से समापन किया गया। गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ के वायदे के संग शहर के प्रत्येक मोहल्ले से रथ पर गजानन की सवारी निकाल प्रथम पूज्य गणेश को विदा किया। यात्रा में ढोल नगाड़ों की धुन पर झूमते हुए भक्तों ने रंग-गुलाल की होली खेली।
13 सितंबर को रंगारंग तरीके से शहर में गणेश महोत्सव का आगाज हुआ था। गली-गली में पांडाल सजाकर गणेश प्रतिमाओं को स्थापित किया था। रविवार को सुबह से ही दिल्ली रोड और कांठ रोड पर विसर्जन यात्राएं निकलना शुरू हो गई थीं। आशियाना रोड पर रामगंगा के लिए जाने वाले रास्ते पर तो शोभायात्राओं की लाइन लग गई। बहुत से श्रद्धालु बाइक और कार के माध्यम से गणपति बप्पा को लेकर गए तो कुछ अपनी गोद में लेकर विसर्जन करने गए। चक्कर की मिलक मुकर्ररपुर से दो यात्राएं निकलीं। डीजे की धुन पर भगवान गणेश की सुरीले भजन और भगवान शंकर व मां पार्वती के स्वरूप में सजे बच्चे मन मोह रहे थे। रंग-गुलाल उड़ाते हुए भगवान की प्रतिमा को रामगंगा में विसर्जित किया। नवीन नगर दुर्गा मंदिर में भगवान की प्रतिमा दस दिन के लिए स्थापित की गई थी। पंडित शंकर दत्त ने बताया कि विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद आरती होती थी। इस दौरान महीपाल, रश्मि, जसपाल, सारिका आदि रहे।
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बुद्धि विहार से भी विसर्जन के लिए भगवान की प्रतिमा रामगंगा नदी के तट पर लाई गई। इस दौरान सुरेंद्र सिंह, मोनू, ललित, सौरव आदि मौजूद रहे। डिप्टी गंज में पल्लवी और जितेंद्र मल्होत्रा ने अपने घर में गणपति भगवान की स्थापना की थी। पंडित पवन मुरारी के अलावा सुरेश, पूनम, पलक, देव मल्होत्रा भगवान की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए आए।
आशियाना फेस टू के श्रद्धालुओं ने गणेश चतुर्थी के दिन भगवान की प्रतिमा की स्थापना की थी। विसर्जन में ममता सैनी, इस दौरान रश्मि धर, मनीष वर्मा, शिवि आदि मौजूद रहे।

गंदगी के बीच किया विसर्जन
रविवार को दिन में बारिश होने की वजह से रामगंगा के तट पर कीचड़ हो गई थी। इसके अलावा चारों तरफ पड़ी हुई पॉलिथीन भी बजबजा रही थीं। श्रद्धालुओं ने नंगे पैर इसी दलदल के रास्ते होते हुए तट पर पहुंचे। एक-दूसरे का हाथ थामकर उन्होंने भगवान की प्रतिमा को विसर्जित किया।
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बन गया मेले जैसा माहौल
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद तट पर चाट-पकौड़ी, बर्फ और खिलौने के ठेले लग गए, जिससे वहां का माहौल मेले जैसा बन गया। भगवान की प्रतिमा का विसर्जन करने के बाद बहुत से लोगों को चाट-पकौड़ी का आनंद उठाया।
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