पटना में हुई राष्ट्रीय सैंबो प्रतियोगिता में मुरादाबाद के खिलाड़ियों ने परचम फहराया है। तीन खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर अपना और शहर का नाम रोशन किया है। अब इन्हें जार्जिया और रोमानिया में होने वाली प्रतियोगिता में शामिल होना है। इन खिलाड़ियों के दौरे में आर्थिक समस्या अड़चन न बने, इसके लिए अधिकारियों ने प्रायोजकों की तलाश शुरू कर दी है।
सैम्बो फेडरेशन आफ इंडिया के महासचिव डिप्टी राम शर्मा ने बताया कि विश्व यूथ व जूनियर सैम्बो प्रतियोगिता खेलने के लिए टीम पांच अक्तूबर को जार्जिया जा रही है। खिलाड़ियों के 25-26 सितंबर तक पासपोर्ट मांगे गए हैं, ताकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों का फाइनल ट्रायल हो सके। अभी तक एक भी खिलाड़ी का पासपोर्ट नहीं आया है। वहीं, नवंबर में वर्ल्ड सीनियर चैंपियनशिप के लिए टीम रोमानिया जाएगी। यदि पासपोर्ट मिल जाएगा तो सात दिन में एक्सप्रेस वीजा लगवाकर टीम को भेज दिया जाएगा। इसके अलावा हर महीने कोच और रेफरी को सेमिनार प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना ने बताया कि प्रतियोगिता में जितने भी पदक जीते हैं, वह खिलाड़ियों की खुद की मेहनत है। विभाग की ओर से उनके अभ्यास पर ध्यान नहीं दिया गया था, लेकिन अब जिला स्तर पर दस दिवसीय प्रशिक्षण के लिए एशियन गेम्स में कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को बतौर प्रशिक्षक बुलाया जाएगा। उनके रहने और खाने का इंतजाम क्रीड़ा विभाग करेगा। इसके अलावा पांच-पांच खिलाड़ियों को नीली और लाल ड्रेस दिलवाई जाएगी। विदेशी दौरे में उन्हें आर्थिक समस्या न रहे, इसके लिए जिला प्रशासन, खेल कार्यालय और उद्यमियों से धनराशि की व्यवस्था की जा रही है।
इन खिलाड़ियों ने जीते स्वर्ण पदक
निशांत विश्नोई
मूलरूप से बिजनौर निवासी और कक्षा 10 के छात्र निशांत विश्नोई ने अंडर 100 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता है। निशांत ने बताया कि कुश्ती में पिता 15 बार राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं, जिसमें छह बार आल इंडिया यूनिवर्सिटी भी जीते हैं। उन्होंने ही मुझे खेलना सिखाया था। पिता विपिन विश्नोई ने बताया कि बेटा ही अधूरे सपने पूरे करेगा। जितने भी बड़े पहलवान हैं, वह सब किसान के बेटे हैं। जरूरत पड़ने पर जमीन बेचने से भी नहीं हिचकते हैं। इसलिए बेटे की सफलता को जरूरतों से समझौता करेंगे।
सूरज सिंह
गत चार वर्षों से सूरज स्टेडियम में जूडो का अभ्यास कर रहे हैं। पिता मेडिकल स्टोर पर प्राइवेट नौकरी करते हैं। आर्थिक समस्याएं भी आती हैं, लेकिन अपने खेल पर वह इनका असर नहीं पड़ने देना चाहते। बस अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का जुनून है। यही वजह है कि 52 किग्रा वर्ग में उन्होंने हरियाणा के खिलाड़ी को 10-0 से शिकस्त दी। वह कहते हैं कि पासपोर्ट तो पास है। बस धनराशि का इंतजाम हो जाए तो जार्जिया में सपने को पूरा करूंगा।
यास्मीन
कांठ निवासी यास्मीन के पिता भी प्राइवेट नौकरी करते हैं। प्रतिदिन स्टेडियम में अभ्यास करने के लिए आती हैं। कई बार घर पहुंचने में रात को दस बज जाते हैं। प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने से पहले उन्होंने 17-18 अगस्त को रोहतक में हुई सीनियर राष्ट्रीय ग्रेप्लिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुकी हैं। कहा कि नवंबर तक अपना पासपोर्ट बनवा लूंगी।