बढ़ रहा स्पर्म दान करने का चलन, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद स्पर्म बैंक को कर रहे दान
अभिनव चौहान
मुरादाबाद।
2012 में आई फिल्म विक्की डोनर को लेकर काफी विवाद हुआ था। लोगों ने उसको गलत बताते हुए समाज की दुहाई दी। लेकिन उसके क्लाइमेक्स ने सभी को झकझोर दिया। अब तक बड़े शहरों में ही स्पर्म दान के जरिए सूने आंगनों में किलकारी गूंज रही थीं। लेकिन अब छोटे शहर भी विज्ञान की इस तकनीक को स्वीकार रहे हैं। खुलकर सामने आने में अब भी हिचक रहे हैं। लेकिन मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा जैसे छोटे शहरों में भी अब स्पर्म दान करने वालों की संख्या काफी है। छोटे शहरों के ये विक्की डोनर कई सूने आंगनों की किलकारी बन रहे हैं।
मुरादाबाद में भी अधिकृत स्पर्म बैंक हैं। जहां रोजाना कई युवा स्पर्म दान करने के लिए संपर्क कर रहे हैं। छह माह की लैब टेस्टिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पर्म को निषेचन के लिए प्रयोग किया जाता है। उससे पहले उसकी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। स्पर्म दान करने वाले की पहचान किसी कीमत पर उजागर नहीं की जाती। यहां तक की उसके स्पर्म के नमूने को भी पास होने के बाद नाम से नहीं, बल्कि नंबर से पहचाना जाता है। आंखों का रंग, बालों का रंग, लंबाई आदि सभी अलग-अलग गुणसूत्रों के आधार पर स्पर्म को श्रेणीबद्ध किया जाता है। एक युवा स्पर्म डोनर ने बताया कि वह निर्धारित अवधि के बाद स्पर्म डोनेट करता है। उसे इसका पेमेंट जरूर मिला। लेकिन जब उसे ये पता लगा कि उसके स्पर्म से एक सूने आंगन में किलकारी गूंजी तो काफी खुशी हुई, हालांकि आज तक उस बच्चे को मैंने देखा नहीं है।