पहली तिमाही में ही इंडस्ट्री को 160 करोड़ का नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
ड्रा बैक की दरें घटने से सबसे ज्यादा नुकसान बड़े निर्यातकों को है। शहर में कई ऐसे निर्यातक हैं जिनका टर्न ओवर 200 करोड़ रुपये से ऊपर है। 100 करोड़ टर्न ओवर वाले निर्यातकों की भी लंबी लिस्ट है। यह निर्यातक न्यूनतम मुनाफे पर एक्सपोर्ट करते हैं। कई निर्यातक तो ड्रा बैक के भरोसे रेट टू रेट पर भी निर्यातक करते हैं। अभी तक ब्रास के प्रोडक्ट्स निर्यात करने पर 10.8 फीसदी की दर से निर्यातकों को सरकार ड्रा बैक देती थी।
ड्रा बैक की दर घटकर 2.2 फीसदी रह जाने से बड़े निर्यातक सकते में हैं। इन्हाेंने दिसंबर तक के आर्डर पहले ही बायर्स से बुक कर रखे हैं। ब्रास के साथ एल्युमिनियम, लोहा, स्टेनलेस स्टील, शीशा, किस्टल पर भी सरकार ने ड्रा बैक को 80 फीसदी तक घटा दिया है। अब निर्यातकों के सामने संकट यह है कि उन्हें विदेश में अपनी साख बचाने के लिए बायर्स को पुरानी दर पर ही आर्डर की डिलीवरी देनी होगी। ड्रा बैक को मुनाफा समझकर आर्डर लेने वाले निर्यातक हाथ मल रहे हैं। कुछ निर्यातकों ने बायर्स को मेल भेजकर रेट बढ़ाने का अनुरोध किया। जिसे बायर्स ने खारिज कर दिया है।