शहर की आवोहवा में जहर घोल रही 25000 से अधिक पीतल भट्ठियों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। शहर के घनी आबादी वाले इलाकों और तंग गलियों में स्थित यह भट्ठियां पीतल गलाने और ढलाई करने में इस्तेमाल हो रही हैं। दो वर्ष पूर्व इन भट्ठियों को बंद करने के लिए मुहिम शुरू हुई थी। प्रशासन दो - चार दिन सख्ती भी की लेकिन बाद में यह अभियान ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
महानगर में 2000 से ज्यादा एक्सपोर्ट फैक्ट्री हैं। इन फैक्ट्रियों का जॉब वर्क करने के लिए शहर में 25000 से ज्यादा पीतल भट्ठियां हैं। यह भट्ठियां कोयले से संचालित हो रही हैं। इन भट्ठियों पर पीतल की गलाई, ढलाई से लेकर निर्यात होने वाले उत्पादों के प्राथमिक ढांचे को तैयार किया जाता है। कोयले से संचालित होने की वजह से यह भट्ठियां प्रदूषण फैलाती हैं। इनकी वजह से शहर की हवा में जहर घुल रहा है। यही वजह है कि पिछले दो सालों में शहर का प्रदूषण स्तर देश में पहले पायदान पर पहुंच चुका है। इन भट्ठियों को इलेक्ट्रिक भट्ठियों में परिवर्तित करने की मांग कई बार उठ चुकी है। निर्यातकों ने एक इलेक्ट्रिक भट्ठी तैयार करके उसका डैमो भी अधिकारियों और कई मंत्रियों को दिखाया है। लेकिन सरकार इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं ले सकी है। इलेक्ट्रिक भट्ठी के महंगा होने की वजह से दस्तकार इसमें सरकार से अनुदान की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार फिलहाल अनुदान देने के लिए तैयार नहीं है।