स्वास्थ्य विभाग के खाते में भरपूर खजाना होने के बावजूद मंडल के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का टोटा है। दवाओं की खरीद नहीं होने की वजह से मरीज दवाओं के लिए भटक रहे हैं। नवागत मंडलायुक्त यशवंत राव ने इस मामले में बुधवार को एडी हेल्थ को अपने कार्यालय में तलब कर स्पष्टीकरण मांगा है। कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी सूरत में अस्पतालों में दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए।
मुरादाबाद मंडल में अकेला बिजनौर ऐसा जिला है जहां दवाओं का टोटा नहीं है। मुरादाबाद जिला अस्पताल और जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी है। 600 दवाओं की सूची में से महज 20 तरह की दवाएं ही जिले के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं। यही हाल संभल, रामपुर और अमरोहा जिले का है। पिछले तीन माह से जिले के सरकारी अस्पताल बगैर दवाओं के चल रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अफसरों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। सरकारी अस्पतालों में डाक्टर मरीजों को देख तो रहे हैं लेकिन उन्हें दवाएं देने के बजाए पर्चे पर दवा का नाम लिखकर मेडिकल का रास्ता दिखा दिया जाता है। दवाओं की किल्लत जैसे आम आदमी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर अफसरों की अनदेखी से गरीब मरीज पिस रहे हैं। नवागत मंडलायुक्त यशवंत राव का ध्यान इस ओर गया तो उन्होंने बुधवार को इस मुद्दे पर अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. सत्य सिंह को आंकड़ों समेत तलब किया। कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पूछा है कि जब विभाग के पास पर्याप्त बजट है तो फिर दवाओं की कमी क्यों है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी गंभीर और संवेदनशील मामला है, दवाओं की किल्लत तुरंत दूर की जाए।