जीएसटी में नवंबर से पंजीकृत फर्म का स्थलीय सत्यापन किया जाएगा। यह फैसला औचक निरीक्षण में मंडल की ढाई सौ फमों के बोगस पाए जाने के बाद लिया गया है। विभाग को आशंका है कि टैक्स चोरी के उद्देश्य से एक फर्म ने कागजों में कई फर्म पंजीकृत करा ली है। उन फर्मों में उत्पादन नहीं हो रहा है, बल्कि उनके नाम से कागज तैयार करके टर्न ओवर दिखा रहे हैं।
अपर आयुक्त जीएसटी प्रशासन आरके सिंह ने बताया कि मंडल के मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, बिजनौर और संभल जिलों में इन दिनों 56 हजार से अधिक फर्म और फैक्ट्री पंजीकृत हैं। इनमें से 18 हजार फर्मों का पंजीकरण जीएसटी लागू होने केबाद हुआ है। शेष फर्म पहले की ही पंजीकृत हैं।
जीएसटी बनने के बाद एक साल के दौरान 15 हजार फमोँ का पंजीकरण हुआ था। शुरुआत में तो जीएसटी केअधिकारी इन फर्मों केपंजीकरण और खामियों को सुधारने में लगे हुए थे। जीएसटी पोर्टल की समस्याओं का समाधान होने के बाद असतित्वहीन रजिस्टर्ड फर्मों पर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
प्रथमदृष्टया ढाई सौ फर्म इस तरह की चिन्हांकित की गई हैं। अब इन फर्मों की विस्तृत जांच की जा रही है। दो माह पहले फर्जी प्रपत्र केआधार रजिस्टर्ड की र्गईं चार फर्म के संचालकों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी हैं। करीब 45 फर्मों के असतित्वहीन पाए जाने पर उनके पंजीकरण निरस्त किए गए हैं।