मुरादाबाद। पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित एक स्कूल के वार्षिकोत्सव में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अपने संबोधन में कहा कि देश की तरक्की के लिए लोगों को मजहबी नफरत भुलानी होगी। उन्हाेंने कहा कि हिंदू - मुसलमान के बीच जो नफरत दिख रही है वह केवल सोशल साइट्स तक सिमटी है। वास्तविक जीवन मेें सभी धर्मों के लोग आपस में प्रेम से रह रहे हैं।
पीटीसी में लाइफ डिजाइन स्कूल के वार्षिकोत्सव में ‘अखंड भारत निर्माण में शिक्षा का महत्व’ विषय पर आयोजित संवाद में जस्टिस काटजू ने कहा कि देश की तरक्की के लिए मजहबी नफरत को भुलाकर एक दूसरे के साथ प्रेम से रहना जरूरी है। तभी भारत की तरक्की तेजी से होगी। पूर्व न्यायाधीश ने उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इससे पहले पत्रकार वार्ता में जस्टिस काटजू ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र देश की तरक्की में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र देश को धर्म और जाति में बांटता है। उन्होंने कहा कि इस समय देश बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। क्योंकि एक-दो नेताओं को छोड़ देश के बाकी सभी नेता सत्ता और पैसे के चक्कर में पड़े हैं। नेताओं की रुचि देश की तरक्की में नहीं बल्कि किसी भी तरह अगला चुनाव जीतने में होती है। जस्टिस काटजू ने कहा कि चीन में संसदीय लोकतंत्र नहीं है इसलिए चीन हमारे देश से कई गुना आगे है।