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बुखार और खुजली जैसी दवाओं के लिए भटक रहे मरीज

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मुरादाबाद।
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मुरादाबाद जिले के सरकारी अस्पतालों में दवा का संकट खड़ा होने लगा है। कारपोरेशन बनने से अस्पतालों को दवा की सप्लाई देने वाली कंपनियों ने हाथ खींच लिए हैं। दवाओं के आर्डर की पूर्ति नहीं होने से अस्पतालों के लिए सप्लाई बाधित हो गई है। प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज इंजेक्शन तो दूर बुखार, खुजली और एंटीबायोटिक जैसी मामूली दवाओं के लिए मरीज भटक रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद आनलाइन पोर्टल से होती है। दवा खरीद के लिए कंपनियों से अनुबंध है। अस्पतालों को चार किस्तों में बजट जारी होता है। अस्पताल जरूरत के हिसाब से पोर्टल पर आर्डर करते हैं। आगामी कुछ महीनों में अस्पतालों को दवा का बजट बंद हो जाएगा और दवाओं की आपूर्ति कारपोरेशन से की जाएगी। इससे अनुबंधित कंपनियां दवाओं के बिल लटकने से आशंकित हैं। इसी आशंका के चलते कंपनियों ने पोर्टल पर दवाओं की सूची में कटौती हो गई है। जो दवाएं पोर्टल पर हैं उनकी सप्लाई भी कम कर दी है।
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जिला औषधि केंद्र से जिले के 70 प्राथमिक, सामुदायिक और एडिशनल सामुदायिक केंद्रों में दवाओं की सप्लाई होती है। विगत महीनों में केेंद्र से 127 आर्डर दिए गए हैं। मात्र 36 आर्डर पर आपूर्ति दी गई है। 36 आर्डर की आपूर्ति भी लगातार रिमाइंडर करने पर हुई है। कंपनियों से आपूर्ति बाधित होने से बुखार, सर्दी जुकाम, खुजली के अलावा एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक क्रीम जैसी दवाओं के लिए मरीज भटक रहे हैं। अस्पतालों में आजकल इनकी सबसे अधिक जरूरत है। मौसम बदलने से मरीजों की संख्या काफी अधिक है। डाक्टर पर्चे पर दवाएं लिख रहे हैं। अस्पतालों में दवाएं नहीं मिलने से मरीज परेशान भटकने को मजबूर हैं।
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- कंपनियां मनमानी कर रही हैं। आर्डर पर आपूर्ति नहीं दे रही हैं। आर्डर की अवधि 45 दिन होती है। 20 दिन गुजरने के बाद ही रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। इसके बाद भी आपूर्ति नहीं हो रही है।
- एसपी सिंह, चीफ फार्मेसिस्ट, औषधि केंद्र
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