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इतिहास समेटे है कंबल वाला ताजिया

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मुरादाबाद।
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महानगर में मुहर्रम के जुलूस की शुरूआत कंबल वाले ताजिया से होती है। इसको डीएम और एसएसपी की मौजूदगी में उठाया जाता है। दोनों अधिकारी ताजिया उठाने में सहयोग करते हैं। इसको ताजियों का सरदार कहा जाता है। कंबल वाले ताजिया की शुरूआत 1885 में काली सुल्तान हुसैन ने की थी। उस समय जिले में सामान्य वाले मात्र छह ताजिया निकलते थे। अब इनकी संख्या 400 से ज्यादा है।
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काले कंबल से बनने वाले इस ताजिया को ताजियों का सरदार कहते हैं। मान्यता के अनुसार कंबल वाला ताजिया उठाकर सबसे आगे ले जाया जाता है। इसके साथ कुछ दूरी तक डीएम-एसएसपी सहित जिले के आला अधिकारी, ताजिया इंतजामिया कमेटी के लोग और बच्चे चलते हैं। इस ताजिया को हूरों की मौजूदगी में उठाया जात है। हूरों का भी अपना इतिहास है। कंबल वाले ताजिया को देखने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ लगती है। कंबल वाले ताजिया को ले जाकर ईदगाह में रखा जाता है। उसके बाद अन्य ताजिया आगे निकलकर करबला पहुंचते जाते हैं। करबला में सभी ताजियों के दफन होने के बाद सबसे आखिर में कंबल वाला ताजिया करबला में पहुंचता है।
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