मुरादाबाद। नए नियमों के तहत अब वाहनों को चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना भी आसान नहीं है। प्रदेश सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन प्राक्टोरिंग शिक्षार्थी लाइसेंस प्रणाली (फेसलेस) लागू की, लेकिन 32 दिनों में ऑनलाइन टेस्ट के दौरान 18 फीसदी युवक फेल हो गए।
परिवहन विभाग कार्यालय के अनुसार शासन ने 28 मई 22 को प्राक्टोरिंग शिक्षार्थी प्रणाली लागू की थी। नयी प्रणाली लागू होने के बाद 3866 लोगों ने लर्निंग लाइसेंस के लिए आनलाइन आवेदन किया था। अभिलेखों की जांच के दौरान 788 आवेदकों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। इनमें कई लोगों के हस्ताक्षर भी सही नहीं पाए गए। बाकी बचे आवेदकों ने ऑनलाइन टेस्ट दिया। आवेदकों से रेड लाइट, स्पीड लिमिट और सड़क पर लगाए गए यातायात चिन्हों के आसान सवाल पूछे गए। सही जवाब नहीं देने पर 450 अर्थात 18 फीसदी युवक फेल हो गए। इन युवकों में ज्यादा पढ़े लिखे भी शामिल हैं। इस बारे में पूछने पर संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) ने बताया कि आवेदकों के टेस्ट देते समय दो ऑपरेटर कंप्यूटर पर तैनात रहते हैं। यदि कोई नकल करता है या अन्य प्रकार की गड़बड़ी करता है तो पकड़ में आ जाता है। इसमें आवेदकों की चालाकी काम नहीं आती है। लर्निंग लाइसेंस सिर्फ छह माह तक के लिए होता है। विभाग एक दिन के लिए 125 का स्लॉट निर्धारित करता है, लेकिन प्रतिदिन 90 या सौ आवेदक आते हैं।