झांझनपुर प्राथमिक विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) में बच्चों को चार दिन से मध्याह्न भोजन वितरण नहीं होने और भोजन की गुणवत्ता खराब होने की जानकारी पर राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता ने शनिवार को स्कूल का औचक निरीक्षण किया। भोजन की गुणवत्ता देख आयोग अध्यक्ष दंग रह गए। बच्चों की शिकायत पर अध्यक्ष ने बीएसए को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि जब बच्चे घर से खाना लेकर आ रहे हैं तो मिड डे मील चलाने का क्या मतलब है।
झांझनपुर स्कूल में 172 बच्चे पंजीकृत हैं। सूखी रोटियां, मोटा चावल और दाल के नाम पर नमक एवं हल्दी मिक्स पानी परोसे जाने से 80 फीसदी बच्चे मध्याह्न भोजन नहीं खाते हैं। बच्चों की शिकायत करने पर एनजीओ संचालक ने खाने की गुणवत्ता सुधारने के बजाए पिछले चार दिन खाने का वितरण बंद कर दिया। प्रधानाध्यापिका रजनी बाला की लिखित शिकायत पर शुक्रवार से खाने का वितरण शुरू हुआ। खाने में तहरी भेजी गई। तहरी की गुणवत्ता खराब होने से बच्चों ने खाने से मना कर दिया। अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। खबर पढ़कर राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता शनिवार को स्कूल पहुंच गए।
प्रधानाध्यापिका ने बताया कि खाना बेहद खराब आता है। बच्चे सूखी रोटियां नहीं तोड़ पाते हैं। ठंडा और मोटा चावल बच्चों के गले नहीं उतरता है। दाल ढूंढने से नहीं मिलती है। आयोग अध्यक्ष ने शनिवार को स्कूल में आया एनजीओ का खाना देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सब्जी के नाम पर आलू का घोल था और वह भी गंदे बर्तन में रखा गया था। आयोग अध्यक्ष ने कक्षावार बच्चों से पूछताछ की। बच्चों ने बस्तों से घर से लाए लंच बाक्स निकालकर स्कूल में बंटने वाले खाने की गुणवत्ता की पोल खोल दी। बच्चों ने कहा कि स्कूल का खाना खाकर पेट दर्द हो जाता है। वो घर से ही खाना लाते हैं। आयोग अध्यक्ष ने बीएसए योगेंद्र कुमार को कड़ी फटकार लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत करने की चेतावनी दी। आयोग अध्यक्ष ने स्कूल का निरीक्षण भी किया। शौचालय गंदा और दरवाजा टूटा होने पर नाराजगी जताई।
एडी बेसिक की टीम भी पहुंची
मिड डे मील के खाने की गुणवत्ता खराब होने की खबर प्रकाशित होने पर एमडी बेसिक की टीम भी स्कूल पहुंची। टीम ने बच्चों और प्रधानाध्यापिका से बातचीत की। प्रधानाध्यापिका ने बताया कि कई बार शिकायत कर दी है, कोई नहीं सुनता है।