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बैंकों ने किसानों से हड़पे एक हजार करोड़

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मुरादाबाद। बैंकों ने 1994 से लेकर पिछले साल तक किसानों से करोड़ों रुपये का मनमाना ब्याज वसूल लिया। आरबीआई की गाइड लाइन और बैंक रेग्यूलेशन एक्ट को दरकिनार कर किसानों के कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज वसूल लिया। केंद्र सरकार ने मार्च में माना कि चक्रवृद्धि ब्याज वसूलना गैर कानूनी है और इस धनराशि को वापस कराया जाएगा। पुराना काटा गया करोड़ों रुपया मिलना तो दूर, अभी इसकी लगातार वसूली की जा रही है।
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बैकिंग रेग्युलेशन एक्ट 1994 के अनुसार फसल ऋण पर बैंक किसानों से चक्रवृद्धि ब्याज नहीं वसूल सकता । इसको लेकर आरबीआई निर्देश जारी कर चुका है। भाकियू ने पिछले दिनों इसको समाज सेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में प्रमुखता से उठाया था। उसी के चलते 29 मार्च को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने अन्ना हजारे को लिखे पत्र में कहा है कि बैंकों ने चक्रवृद्धि ब्याज गलत वसूला ऐसे में बैंकों से पूछताछ कराकर किसानों से वसूला गया चक्रवृद्धि ब्याज वापस कराया जाएगा। मुरादाबाद मंडल में करीब 24 लाख किसान हैं। इनमें से 16 लाख पर किसी न किसी प्रकार का बैंक कर्ज है। एक आंकलन के अनुसार करीब 100 करोड़ रुपया सालाना चक्रवृद्धि ब्याज के रूप में वसूला जा रहा है। भाकियू ने मंडलायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर इस वसूली को तत्काल रुकवाने की मांग की है।

फसल ऋण व अन्य कृषि कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज नहीं लिया जा सकता है। आरबीआई 1994 में स्पष्ट आदेश भी कर चुका है। इसके बावजूद वसूली जारी है।
- चौ. हरपाल सिंह, अराष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू असली।

किसानों से छमाही चक्रवृद्धि ब्याज वसूला जाता है, जबकि अन्य ग्राहकों से माहवार व साप्ताहिक चक्रवृद्धि ब्याज की वसूली का प्रावधान है। बैंक हित में इस तरह चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाता है, जिससे किसानों को भी परेशानी न हो।
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- जितेंद्र कुमार, मुख्य प्रबंधक, मंडलीय कार्यालय इलाहाबाद बैंक।
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