मुरादाबाद। तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना में संतोष देवी की मौत के बाद शुरू हुए अभियान को डेढ़ महीने से ज्यादा समय हो चुका है। 16 तेंदुए पिंजरों में कैद हो चुके हैं, वाहनों की टक्कर से दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। लेकिन ठाकुरद्वारा और कांठ में तेंदुओं की दस्तक थमी नहीं है। चार लोगों की जान लेने और 12 को घायल करने के बाद भी ठाकुरद्वारा और कांठ के गांवों में तेंदुए लगातार दिखाई दे रहे हैं और हमले भी सामने आ रहे हैं। लोगों का सवाल बरकरार है कि आखिर और कितने आदमखोर गन्ने के खेतों में छिपे हैं।
वन विभाग ने 40 से अधिक गांवों को तेंदुआ प्रभावित घोषित किया है और करीब 100 तेंदुओं की मौजूदगी मानी है। अभियान के लिए शुरुआत में 16 पिंजरे लगाए गए थे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 49 ज्यादा कर दी गई। संवेदनशील गांवों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। 17 सितंबर तक 40 से ज्यादा संवेदनशील गांवों में 49 पिंजरे और 40 ट्रैप कैमरे लगाए जाने की जानकारी वन विभाग की ओर से दी गई है। अभियान में छह जिलों के करीब 80 कर्मचारी भी लगाए गए हैं। 32 दिनों में अभियान पर करीब 45 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन तेंदुओं के पकड़े जाने के साथ ही नए इलाकों से उनकी मौजूदगी की सूचनाएं भी आती रही हैं। डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि कैमरों से तेंदुओं की आवाजाही वाले स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं और उन्हीं जगहों पर पिंजरे लगाए जा रहे हैं। रात में वनकर्मी प्रभावित गांवों और खेतों के आसपास गश्त कर रहे हैं।
26 दिन में चार जानें गईं
3 अगस्त : लालापुर पीपलसाना
खेत में काम कर रहीं संतोष देवी पर तेंदुए ने हमला किया। हमले में उनकी मौत हो गई। इसके बाद वन विभाग ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
18 अगस्त : बहापुर बलिया
खेत में पशुओं के लिए चारा लेने गईं बह्मो देवी पर तेंदुए ने हमला किया। हमले में उनकी जान चली गई। यह 15 दिन के भीतर दूसरी महिला की मौत थी।
25 अगस्त : बहापुर बलिया
खेत में चारा काट रही मिथलेश देवी पर तेंदुए ने हमला किया। तेंदुआ उन्हें गर्दन से पकड़कर खींच ले गया। मौके पर उनकी मौत हो गई।
29 अगस्त : बहापुर बलिया
घर के कमरे में सो रहे जगराज सैनी को तेंदुआ उठा ले गया। अगले दिन सुबह खेत में उनका शव मिला। इस घटना के साथ तेंदुए के हमलों में मौतों का आंकड़ा चार हो गया।
इन गांवों में अब तक पकड़े गए 16 तेंदुए
वन विभाग के अभियान में शुरुआत में बहापुर बलिया, लालापुर पीपलसाना और मलकपुर सेमली से तेंदुए पकड़े गए। इसके बाद बहापुर बलिया में दूसरा तेंदुआ पकड़ा गया और ठाकुरद्वारा क्षेत्र में संख्या चार पहुंची। 5वां तेंदुआ 17 अगस्त को रामूवाला शेखू में पिंजरे में कैद हुआ। छठां तेंदुआ भी 17 अगस्त को रामूवाला शेखू में पकड़ा गया। सातवां तेंदुआ 22 अगस्त को सरकड़ा परम गांव में वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ। आठवां तेंदुआ 22 अगस्त को कोठा महमूद में पकड़ा गया। नवां तेंदुआ 24 अगस्त को सलेमपुर में, 10वां 25 अगस्त को सहसपुरी में, 11वां 31 अगस्त को लौंगी खुर्द में, 12वां चार सितंबर को सहसपुरी में, 13वां 10 सितंबर को सैंजनी में, 14वां 13 सितंबर को मलकपुर सेमली में 15वां 16 सितंबर को कांठ के रामसराय भांकरी में और 16वां तेंदुआ 17 सितंबर को कांठ के भरतपुर में पिंजरे में तेंदुआ कैद हुआ।