मुरादाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब रविवार को हेलीकाप्टर से सर्किट हाउस की जमीन पर कदम रखा तो मंडल में मिली करारी हार की टीस ताजा हो गई। शायद यही वजह थी कि सलामी लेने के बाद सीधा अपने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से रूबरू हुए योगी ने उन्हें आत्मचिंतन की सीख दे डाली। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सुनामी में भी मंडल की सभी छह सीटों को हार जाना शर्मनाक है। उन्होंने हिदायत दी कि जनप्रतिनिधि कार्यकर्ताओं और जनता की उपेक्षा हरगिज नहीं करें। संगठन के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर रिश्तों की जरूरत बताते हुए योगी ने सभी से एकजुट होकर काम करने को कहा।
मुख्यमंत्री के सर्किट हाउस में आने से पहले ही खेल एवं युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान, ग्राम्य विकास चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)/ जिले के प्रभारी मंत्री डा. महेंद्र सिंह, पंचायती राज व लोक निर्माण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)चौधरी भूपेंद्र सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री बल्देव सिंह औलख, राज्य मंत्री गुलाब देवी सर्किट पहुंच चुके थे। महापौर विनोद अग्रवाल, शहर विधायक रितेश गुप्ता, कांठ विधायक राजेश चुन्नू, पूर्व सांसद सर्वेश सिंह, बिजनौर के पूर्व सांसद कुंवर भारतेंदु समेत मंडल के सभी भाजपा जिलाध्यक्ष व वरिष्ठ पदाधिकारी यहां मौजूद थे। सीएम ने मंडल की हार पर अपनी टीस जाहिर की तो मंत्री और पार्टी के जनप्रतिनिधि नजरें झुकाए बैठे रहे। 2014 में मंडल की सभी छह लोकसभा सीटें भाजपा के पास थीं। लेकिन 2019 में मोदी सुनामी के बावजूद मुरादाबाद मंडल की सभी छह सीटें सपा और बसपा के बीच बंट गईं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खासकर मंडल के मंत्रियों को मंडल की हार पर आइना दिखाने के बाद मुख्यमंत्री राही होटल में प्रधानमंत्री का मन की बात कार्यक्रम सुनने पहुंचे। यहां उन्होंने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर टीवी पर प्रधानमंत्री के मन की बात सुनी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा, एमएलसी अशोक कटारिया, एमएलसी डा. जयपाल सिंह व्यस्त, बढ़ापुर विधायक सुशांत सिंह, विधायक राजीव तरारा, धर्मेंद्र मिश्र, महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष अंजू लोचब आदि मौजूद रहे।
मंत्री से संत्री तक किसी को तवज्जो नहीं
मुरादाबाद। मुख्यमंत्री ने रविवार को मंत्री से लेकर संत्री तक किसी को भी खास तवज्जो नहीं दी। मन की बात कार्यक्रम में भी उनके दोनों तरफ पांचों मंत्री बैठे थे लेकिन उन्होंने पूरे समय में किसी एक से भी न तो बात की और न ही किसी की तरफ देखा। इसे मंडल की छह सीटों की हार का नतीजा माना जा रहा है। हारने वाले प्रत्याशियों ने मंत्रियों पर सहयोग नहीं करने और गुटबाजी को बढ़ावा देने की शिकायतें भी अंदरखाने नेतृत्व से की हैं। इससे इतर सीटें गंवाने वाले प्रत्याशियों को उन्होंने खास तरजीह दी। पूर्व सांसद सर्वेश सिंह और पूर्व सांसद कुंवर भारतेंदु मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद में सर्किट हाउस पहुंचे। इन्हें सीएम ने बुलाया और बात भी की। माना जा रहा है कि हारने वाले प्रत्याशियों के आरोपों पर भी सरकार गंभीर है।