डेढ़ साल बीते पर नहीं चला 244 करोड़ का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
क्रासर : प्रोजेक्ट की चूक, 33 हजार केवी लाइन के नीचे बना डाला करोड़ों का प्लांट
एसटीपी संचालन के लिए हाईटेंशन लाइन का शिफ्ट होना जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। रामगंगा नदी के घुटते दम को संजीवनी का इंतजार है। ‘नमामि गंगे योजना’ में रामगंगा नदी के किनारे हनुमान मूर्ति तिराहा पर बने 58 एमएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन जलनिगम और पॉवर कारपोरेशन के बीच डेढ़ साल से अटका हुआ है। जानकारों के मुताबिक एसटीपी प्लांट के ठीक ऊपर से 33 हजार केवी की हाई टेंशन लाइन गुजर रही है। हाईटेंशन लाइन की वजह से 244 करोड़ के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन नहीं हो पा रहा है। नतीजा यह है कि महानगर के 256 नालों का गंदा पानी रामगंगा नदी में बिना उपचारित हुए ही गिर रहा है।
गंगा की सहायक नदियों में शामिल रामंगगा को साफ रखना शासन की प्राथमिकता में है। गंगा समेत सभी सहायक नदियों के किनारे एसटीपी निर्माण अनिवार्य किया जा चुका है। महानगर में एसटीपी प्लांट बनाने और सीवर लाइन डालने का प्रोजेक्ट का शिलान्यास वर्ष 2013 में हुआ था। 2018 में हनुमान मूर्ति तिराहा पर 58 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट बनाया गया। लेकिन प्रोजेक्ट में एक बड़ी चूक हो गई। इस प्लांट का निर्माण 33 हजार केवी हाईटेंशन लाइन के नीचे कराया गया। ट्रायल के दौरान ही हाईटेंशन लाइन से करंट उतरने की शिकायत स्टाफ ने की। इसके बाद प्लांट का संचालन नहीं हो सका था।
सीवर लाइन डालने की प्लानिंग में भी चूक
सिर्फ इतना ही नहीं, एसटीपी को शुरू करने के लिए जलनिगम को 279.91 करोड़ की लागत से 264 किमी लंबी सीवर लाइन डालनी थी। महानगर को चार जोन में बांटकर निर्माण के काम शुरू कराए गए। यहां भी गड़बड़ी सामने आई। पहले चरण में महानगर के 16 नालों को टेप किया जोकि रामगंगा किनारे का क्षेत्र में नहीं थे। बाद में कार्ययोजना में बदलाव किया गया।
सिर्फ 10 एमएलडी सीवरेज का ही शोधन
मौजूदा समय में सिर्फ कटघर से निकलने वाले एक नाले और 2550 घरों का सीवर ही हनुमान मूर्ति तिराहा के 58 एमएलडी वाले एसटीपी प्लांट तक पहुंच रहा है। सिर्फ 10 एमएलडी सीवरेज ही शोधन किया जा रहा है। बाकी गंदा पानी सीधे रामगंगा में गिरता है।
हमारी पॉवर कारपोरेशन के साथ पत्राचार चल रहा है। हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कराया जाना है। बाकी सीवर लाइनों के जुड़ने के बाद एसटीपी में अधिक से अधिक सीवरेज को शोधित किया जाने लगेगा।
- एके त्यागी, परियोजना अधिकारी