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कहीं बड़े हादसे के इंतजार में तो नहीं रेल अफसर

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सांकेतिक तस्वीर
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मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल की पटरियां जर्जर हो चुकी हैं। आये दिन ट्रैक चटकने और टूटने के मामले सामने आ रहे हैं। निचले स्तर के कर्मचारियों की सूझबूझ से हादसे बच रहे हैं। वरना कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अफसर रेल पटरियां बदलवाने के लिए मेगा ब्लाक लेकर यात्रियों की दुश्वारियां तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन ट्रैक न ही बदले जा रहे हैं और न ही ठीक से दुरुस्त किए जा रहे हैं। पिछले दो साल से पटरियां और स्लीपर बदलने के लिए बार बार मेगा ब्लाक लिया जाता है।
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मुरादाबाद रेल मंडल में तकरीबन 27 सौ किलोमीटर ट्रैक है। जिसमें मुरादाबाद दिल्ली रेल मार्ग, मुरादाबाद सहारनपुर, मुरादाबाद लखनऊ, मुरादाबाद अलीगढ़, बरेली चंदौसी, बरेली रोजा है। मुख्य रेल मार्गों पर कुछ जगह नई पटरियों बिछाई जा चुकी है। मुरादाबाद रेल मंडल में 700 किलोमीटर ट्रैक बदलना जाना है। इस साल 375 किलोमीटर ट्रैक बदलने का लक्ष्य तय किया गया है। जिस तेजी के साथ ट्रैक पर कार्य किया जा रहा है। उससे लगता नहीं। रेलवे अपना लक्ष्य पूरा कर पाएगा।

ट्रेनें ओवर लोड चटक रही पटरियां
मुरादाबाद। रेल पटरियों के चटकने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि कुछ जगह अभी पुरानी लाइन हैं। जो लोड नहीं झेल पा रही हैं। एक माह में पांच जगह रेल पटरियां चटकने के मामले सामने आ चुके हैं। नियमानुसार मुख्य लाइन पर 20 साल में पटरियां बदलनी चाहिए। जबकि ब्रांच लाइन पर 25 साल में पटरियां बदली चाहिए। लेकिन मुरादाबाद रेल मंडल में तीस साल से भी ज्यादा पुरानी पटरियों पर ट्रेनें दौड़ाई जा रही है। पेंड्रोल क्लिप गायब हैं और नट वोल्ट ढीले पड़े हैं। कुछ माह पहले आई आडिट टीम ने निरीक्षण के बाद खुद कहा था कि मुरादाबाद रेल मंडल में पटरियां बेहद कमजोर हैं। क्षमता से अधिक मालगाड़ियों में सामान लोड किया जाता है। जिससे पटरियां जवाब दे रही है।
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52 केजी की वजह 60 केजी की पटरियां डाली जा रही
मुरादाबाद। एडीआरएम अश्वनी कुमार ने बताया कि पहले 52 केजी की पटरियां बिछाई जाती थी। लेकिन अब 60 केजी की पटरियों डाली जा रही है। जो अधिक लोड सहन कर लेती है। पुरानी पटरियों की तुलना में नई पटरियों में कम फ्रैक्चर होते हैं।

टूटी पटरी की वजह से पलट गई थी पैसेंजर ट्रेन
मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल के धमौरा में 22 नवंबर 2018 को पैसेंजर ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए थे। हादसे के समय पैसेंजर ट्रेन दिल्ली से लखनऊ जा रही थी। गनीमत रही कि उस वक्त डिब्बे खाली थे। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जांच में सामने आया था कि रेल पटरी टूटी हुई थी। जिसकी वजह से ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे थे। इस हादसे में गार्ड बोगी भी पटरी से उतर गई थी। जिसमें गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया था।

रामपुर में पलट गई थी राज्यरानी एक्सप्रेस
मुरादाबाद। पंद्रह अप्रैल 2017 में मेरठ से लखनऊ जा रही राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेन रामपुर में कोसी पुल के पास पटरी से उतर गई थी। जिसमें 50 यात्री घायल हो गए थे। इस मामले में रेल मुख्यालय से जांच के आदेश हुए थे। आरडीएसओ अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन की रिपोर्ट से पता चला था कि पटरियां बेहद कमजोर हो गई थी। पटरियां घिसकर मानक से कम हो गई थी। जिसकी वजह से ट्रेन के पहिये नीचे उतर गए थे।


ट्रैक चटकने की वजह से दो हिस्सों में बंट गई थी मालगाड़ी
मुरादाबाद। दो माह पहले करैंगी के पास लांग हाल मालगाड़ी दो हिस्सों में बंट गई थी। रेल अफसरों ने इस मामले की जांच की तो पता चला कि ट्रैक दो जगह से चटक गया था। जिसकी वजह से मालगाड़ी को तेज झटका लगा और कपलिंग टूट गई। जिससे मालगाड़ी दो हिस्सों में बंट गई।

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इस साल यहां चटक चुकी हैं पटरियां
कैलसा, रायसी, चौड़ियाला, रसाइया, पीतांबरपुर, फलैदी, काफूरपुर, हबीबवाला, रोजा, हकीमपुर, हरथला, मेवा नवादा, कांठ, हरिद्वार, लक्सर, नजीबाबाद, धामपुर समेत दर्जनों जगह पटरियां चटक चुकी हैं।
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की- मैन और गेटमैन की सूझबूझ से बचे हादसे
मुरादाबाद। मुरादाबाद रेल मंडल में नगरिया सादात यार्ड में मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे रेल पटरी चटक गई थी। की- मैन ने पटरी टूटी देखी तो तुरंत इसकी जानकारी रेलवे कंट्रोल रूम में दी थी। वरना ट्रेन यहां से गुजर जाती। इसके अलावा मंगलवार को करना और मसीत के बीच गेटमैन की सूझबूझ से हादसा बच गया था। सोमवार को मूंढ़ापांडे और रामपुर के बीच कीमैन छोटेलाल ने पटरी चटकी देख ली थी।
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