मुरादाबाद। एक जुलाई में स्कूलों का संचालन शुरू हो जाएगा। शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के विभागीय दावे किए जा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा की किसी को परवाह नहीं है। मानसून सिर पर है। मुरादाबाद जिले में 20 से अधिक स्कूल भवनों की हालत खराब है। इनमें कई भवन तो खंडहर हैं। बारिश में छतें टपकती और दीवारों गिरने का खतरा बना रहता है। स्कूल परिसर ही नहीं बल्कि कमरों में पानी भर जाता है। जर्जर भवनों के नीचे बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ने को मजबूर होते हैं।
बेसिक शिक्षा परिषद के कई स्कूल भवनों की हालत बेहद खराब है। नगर क्षेत्र में किराये के भवनों में चल रहे स्कूल भवन जर्जर हाल में हैं। विभाग स्कूल भवन खाली और मकान मालिक भवनों की मरम्मत करने को तैयार नहीं है। विभागीय और मकान मालिकों की वर्षों से आपसी खींचतान से बच्चों की जान जोखिम में है। मानसून सत्र में नगर क्षेत्र के कई स्कूलों में पानी भर जाता है। कक्षों में पानी भरने से बच्चे सुरक्षित कमरों में सामूहिक बैठने को मजबूर होते हैं। बारिश होने पर स्कूलों में छात्र उपस्थिति भी आधे से कम हो जाती है। भवन गिरने की आशंका के चलते अभिभावक बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजतेे हैं।
पिछले साल ग्रामीण क्षेत्र में एक स्कूल की छत गिर चुकी है। रात की घटना होने से बड़ा हादसा होने से टल गया। इसके बाद ही कई जर्जर स्कूल भवनों को खाली करवाया गया। शहरी क्षेत्र में दो स्कूल भवनों को खाली करवाकर बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया गया। पूरा साल बीत गया, लेकिन स्कूल भवनों की मरम्मत नहीं हो सकी है। जुलाई में बारिश शुरू होते ही बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर होना पड़ेगा।
- जुलाई से स्कूल खुल जाएंगे। जर्जर भवनों में शिक्षण कार्य नहीं कराया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को आदेश जारी कर दिए हैं। जर्जर भवनों की मरम्मत ग्राम पंचायत के माध्यम से कराई जाएगी। पंचायत से बजट नहीं मिलता है तो प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था कर बच्चों को नजदीकी स्कूलों के भवनों में शिफ्ट कराया जाएगा। - योगेंद्र कुमार, बीएसए