मुरादाबाद। मुरादाबाद महोत्सव-2019 में शुक्रवार की रात जिगर मंच पर कुल हिंद मुशायरे का आयोजन किया गया। शहर-ए-जिगर रातभर शायरी की महफिल में डूबा रहा। मंच से एक ओर जहां मोहब्बत का पैगाम दिया गया, वहीं आने वाली नस्लों को आगाह भी किया। देर रात तक श्रोता शेर-ओ-सुखन की महफिल का लुत्फ उठाते रहे।
मुशायरे की सदारत कर रहे प्रो. वसीम बरेलवी ने अपने कलाम से मुशायरे का ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने पढ़ा - रातभर शहर की दीवारों पर गिरती रही ओस और सूरज को समंदर से ही फुर्सत न मिली। अजहर इनायती ने कहा - अपनी तस्वीर बनाओगे तो होगा एहसास, कितना दुश्वार है खुद को कोई चेहरा देना। इकबाल अशर की गजलों पर श्रोता मुग्ध हो गए। उन्होंने पढ़ा ‘कैसी तरतीब से कागज पे गिरे हैं आंसू, एक भूली हुई तस्वीर उभर आई’। अकील नोमानी ने ‘बिछड़ने वाले किसी दिन ये देखने आ जा, चराग कैसे हवा के बगैर जलता है’ पढ़ा। निजामत कर रहे मंसूर उस्मानी ने मौजूदा हालात पर शेर कहा - शीशे से अदावत का यही हाल रहा तो पत्थर पे भी हो जाएगा पथराव किसी दिन। हसीब सोज ने ‘हटाओ हाथ आंखों से ये तुम तो जानता हूं मैं, तुम्हें खुशबू नहीं आहट से भी पहचानता हूं मैं’ पढ़कर माहौल को रुमानी कर दिया।
अतुल अजनबी ने मौजूदा हालात पर शेर पढ़ा - अब गांव की नदी की रवानी बदल गई, पुरखों से जो मिली थी निशानी बदल गई, किरदार यूं तराश रहा था कहानीकार, हम होश में जब आए कहानी बदल गई। अशोक साहिल, अज्म शाकरी, डॉ. नदीम शाद, शरीफ भारती, डॉ. मुजाहिद फराज और जिया जमीर ने भी अशआर पेश किए। इससे पूर्व मुख्य अतिथि एमएलसी डा. जयपाल सिंह व्यस्त ने शमा रोशन की। इस मौके पर प्रदर्शनी प्रभारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।