मुरादाबाद। 682 वर्कआर्डर निरस्त होने के साथ ही घोटालों की परतें उधड़ती जा रही हैं। छानबीन के लिए बनी जलकल और निर्माण विभाग की टीमों को भौतिक सत्यापन में चौंकाने वाले मामले मिले हैं। वर्कआर्डर के मुताबिक जमीन के नीचे पानी की लाइन बिछाई ही नहीं गई। टीम को मौके पर न तो पाइप लाइन बिछी हुई मिलीं और न ही निर्माण कराए जाने के चिह्न। सबमर्सिबल की बोरिंग और हैंडपाइप भी ठेकेदारों ने सिर्फ कागजों पर ही लगाकर भुगतान क्लेम कर दिए। ऐसे करीब 128 प्रकरण हैं। अब जांच पूरी होने के बाद गड़बड़ी करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।
जलकल विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक एसपी श्रीवास्तव के 682 वर्कआर्डर को निरस्त करने के बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि 128 कामों को बिना कराए ठेकेदारोें ने भुगतान पर दावा किया था। इन वर्कआर्डर में हैंडपाइप, सबमर्सिबल की बोरिंग और पानी की लाइन को बिछाने के काम थे। कुटेशन पर 70 से 90 हजार रुपये की कीमत के काम होने थे। लेकिन ठेकेदारों ने जमकर गोलमाल किया।
जलकल में सिर्फ भ्रष्टाचार
अब नये जलकल महाप्रबंधक प्रमोद गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके सामने भ्रष्टाचार से निपटने की चुनौती होगी। निगम ने गड़बड़ी करने वाले ठेकेदारों के भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की है। चर्चा है कि कुछ ठेकेदार ब्लैक लिस्ट भी हो सकते हैं।
नए सिरे से जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई के बारे में विचार किया जाएगा। - संजय चौहान, नगर आयुक्त