चंदौसी। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में करोड़ों रुपये वेतन, मिड-डे मील, फल वितरण, ड्रेस आदि कई योजनाओं में खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा में कोई सुधार नहीं आ रहा है। आलम यह है कि कक्षा पांच के विद्यार्थी न तो इमला लिख पा रहे हैं और न ही शरीर या फलों के अंग्रेजी में नाम बता पा रहे हैं। परिषदीय स्कूलों की यह स्थिति अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान सामने आई।
डिप्टी कलक्टर ओमवीर सिंह इन दिनों परिषदीय स्कूलों का निरीक्षण करने में लगे हैं। सोमवार को गुन्नौर तहसील क्षेत्र के कई विद्यालयों का निरीक्षण किया गया। प्राथमिक विद्यालय हुसैनपुर सैलाब में 152 में सिर्फ साठ बच्चे मौजूद मिले। यहां बताया गया कि पूरी न्याय पंचायत के किसी भी स्कूल में किताबें नहीं मिलीं है। कक्षा पांच के बच्चे दिनों के नाम अंग्रेजी में नहीं बता सके। खंड शिक्षाधिकारी गुन्नौर में बीईओ और एबीआरसी दोनों गैरहाजिर मिले। ब्लाक के निरीक्षण में बीडीओ नदारद थे। प्राथमिक विद्यालय जुनावई में 146 में से 64 बच्चे उपस्थित मिले। यहां भी बच्चों को किताबें नहीं मिलीं। पांचवीं के बच्चे हिंदी में दुर्योधन, पक्षी, राष्ट्रपिता नहीं लिख सके। इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय हरगोविंदपुर में भी पांचवीं के बच्चे गर्दन, पिता और फूल की अंग्रेजी नहीं बता सके। प्राथमिक विद्यालय नंदपुर में चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चे वर्तमान महीने का नाम नहीं बता पाए। प्राथमिक विद्यालय बिचैला भूड़ में बच्चे हड्डी व घुटने एवं फूल व गाजर की अंग्रेजी नहीं बता पाए। प्राथमिक विद्यालय सैमला भूड़ में सहायक अध्यापक प्रवीण कुमार 12 बजे चले गए। तीन बच्चे पैंट और बनियान में मिले। कक्षा पांच के सभी छात्र अनुपस्थित थे। कक्षा चार के छात्रों से हिंदी की किताब नहीं पढ़ी गई एवं इमला भी नहीं लिख पाए। डिप्टी कलक्टर ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है।