मुरादाबाद। 2019 के चुनावी समर में विरोधियों से होने वाली टक्कर से पहले प्रत्याशियों को अपने घर (दल) में बैठे मुखालिफों को साधने की चुनौती है। दलों के भीतर की गुटबाजी प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ सकती है। यह स्थिति कमोबेश हर दल में है। प्रत्याशी भी इससे अंजान नहीं हैं। इसलिए फिलहाल उनका फोकस अपने कुनबे को समेटने पर है। कहीं मान मनौवल से मुखालिफों को साथ लेने की कोशिशें हो रही हैं तो कहीं पार्टी नेतृत्व से दबाव डालकर उन्हें साधने की कवायद चल रही है। टिकटों को लेकर चली होड़ की वजह से मंडल की सभी सीटों पर ऐसे ही हालात हैं।
मुरादाबाद में कुंवर सर्वेश सिंह भाजपा के प्रत्याशी हैं। यहां भी पार्टी की गुटबाजी किसी से छुपी नहीं है। लंबे समय तक सर्वेश सिंह और प्रदेश सरकार के मंत्री व पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मंच साझा करने से बचते रहे हैं। मंत्री का खेमा भी सर्वेश गुट से हमेशा दूर रहा है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में बदले घटनाक्रम ने दोनों की खटास को कम किया है। जिला पंचायत अध्यक्ष मिथलेश रानी का कभी खुला विरोध कर चुके सर्वेश ने कुछ महीने पहले मिथलेश के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मिथलेश के पति महावीर सिंह भूपेंद्र सिंह के निजी सचिव रह चुके हैं। इसलिए मिथलेश को भूपेंद्र खेमे से माना जाता रहा है। मिथलेश के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद से भूपेंद्र और सर्वेश कुछ मौकों पर साथ नजर आए हैं। मिथलेश भी मंगलवार को शाह के मंच के मौजूद थीं। उनके पति महावीर भी वीआईपी गैलरी में पूरे समय मौजूद रहे। लेकिन अंदरखाने दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के बीच खाई अभी नहीं पटी है। शायद यही वजह है कि सर्वेश का पूरा फोकस शहर विधानसभा पर है। उन्हाेंने शहर विधानसभा से पिछले चुनावों के मुकाबले 25 हजार वोट अधिक पाने का लक्ष्य शहर भाजपा संगठन को दिया है। इसके अलावा ठाकुरद्वारा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके राजपाल सिंह को भी सर्वेश के मुखालिफों में गिना जाता है।
सपा आपसी खींचतान में अभी तक टिकट फाइनल नहीं कर सकी है। कांग्रेस ने राजबब्बर को पीछे हटाकर इमरान प्रतापगढ़ी का नाम फाइनल किया है। उनके आने से पहले ही उनका प्रबल विरोध पार्टी के भीतर से शुरू हो गया है। उनके विरोध में कांग्रेस नेता दिल्ली तक दौड़ कर चुके हैं। अमरोहा में भाजपा से कंवर सिंह तंवर प्रत्याशी हैं। यहां भी पार्टी तीन खेमों में बंटी है। पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल भी टिकट की दौड़ में शामिल थे। कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान और सांसद कंवर सिंह तंवर के बीच गुजरे वक्त में जिले में वर्चस्व की जंग किसी से छुुपी नहीं है। हालांकि नेतृत्व के इशारे के बाद यहां बाहर से सबकुछ ठीक दिख रहा है। संभल में भाजपा ने अपने सांसद सत्यपाल सैनी का टिकट काटकर परमेश्वर लाल सैनी को दिया है। सैनी पूर्व में बसपा में रह चुके हैं। हालांकि परमेश्वर को संगठन का साथ हासिल है लेकिन सांसद सत्यपाल खेमे की चुप्पी परेशानियां बढ़ा सकती है। सपा से डा. शफीकुर्रहमान वर्क प्रत्याशी हैं। किसी से छुपा नहीं है कि डा. वर्क और पूर्व मंत्री नवाब इकबाल एक ही पार्टी में रहने के बावजूद राजनीति के दो विरोधी छोर हैं। रामपुर में सांसद डा. नैपाल सिंह की बेटे को टिकट की इच्छा के खिलाफ पार्टी ने पूर्व सांसद जयाप्रदा को यहां से उतारा है।