बाढ़ से पीड़ित 20 हजार किसान फसल बीमा के करीब 80 करोड़ रुपयों से वंचित रह जाएंगे। इन्हें बीमा कराने के लिए न तो सरकारी मशीनरी ने जागरुक किया और न ही अपने स्तर से बीमा का प्रीमियम जमा किया। पिछले सप्ताह बाढ़ से फसल बर्बाद हुई तब किसानों को फसल का बीमा न कराने की याद आई और अफसोस हो रहा है। हालांकि सरकार की ओर से प्रभावित किसानों को मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था है लेकिन यह मुआवजा इन किसानों के लिए ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ की तरह होगा।
जिले के करीब एक लाख किसानों ने खरीफ फसल में धान, बाजरा और उर्द की फसल बोई है। इनमें से करीब 30 हजार किसानों की करीब तीन हजार हेक्टेयर से अघिक फसल को क्षति हुई है। इनमें से करीब दस हजार किसानों ने ही प्रीमियम जमा करके धान की फसल का बीमा कराया है। शेष किसानों ने प्रीमियम बचाने के लालच में बीमा नहीं कराया। अब उन्हें बीमा न कराने का अफसोस हो रहा है। मुरादाबाद जिले में ज्यादातर धान की फसल की जाती है। हालांकि गन्ना और सब्जी की फसल भी बोई गई लेकिन इन दोनों को केंद्र सरकार ने बीमा में शामिल नहीं किया है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब तीस हजार किसानों की धान की तीन हजार हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हुई है। इनमें से 33 फीसदी ने ही फसल का बीमा कराया है। उप निदेशक कृषि अशोक कुमार सिंह का कहना है कि फसल बीमा के लिए किसान को प्रति हेक्टेयर 750 रुपये प्रीमियम देना होता है, जबकि केंद्र सरकार किसान की तरफ से एक हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान प्रदान करती है। जिले में बीमा के लिए टाटा एएनजी कंपनी को अधिकृत किया है।
किसान बोले, हम तो बर्बाद हो गए
- हमारा गांव रामगंगा नदी के पास है। हम लोग सबसे ज्यादा सब्जी की फसल उगाते हैं। बाढ़ ने हमारी फसल तबाह कर दी।
उदय प्रकाश
खेतों में कई फीट पानी भरा हुआ है। जमा पूंजी फसल तैयार करने में खर्च कर दी, वह भी नहीं बची।
अंकित कुमार
बाढ़ ने खेती तबाह कर दी। बिजली आपूर्ति भी बंद है। रात में गांव में अंधेरा छा जाता है। ये भी पता नहीं चल पता कि पानी बढ़ रहा है या घट रहा है।
अरविंद सिंह