तो क्या नगर निकाय चुनाव में भी चलेगा 2012 का फार्मूला
आरक्षित सीट पर दिलीप वार्ष्णेय की पत्नी लक्ष्मी गौतम 2012 में बनीं थीं विधायक
सवर्ण समाज ने शुरू की लक्ष्मी गौतम-2 की तलाश, सरगर्मियां तेज
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी।
चंदौसी नगर पालिका परिषद की सीट यूं तो इतिहास में पहली बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है लेकिन वैश्य समाज इससे झटका लगा है। अध्यक्ष पद वैश्य समाज में रहे, इसके लिए 2012 के विधानसभा में अपनाए गए फार्मूले की तलाश एक बार फिर शुरू हो गई है। यानी वैश्य पति और अनुसूचित जाति की पत्नी का फार्मूले पर एक बार फिर दांव खेला जा सकता है।
वैश्य समाज के बहुल वाले क्षेत्रों में चंदौसी का खास महत्व है। यही कारण है कि नगर पालिका परिषद चंदौसी के अध्यक्ष पद पर हमेशा से वैश्य समाज का कब्जा रहा है। वैश्य समाज ने लंबे समय से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा की सीट पर कूटनीतिक तरीके से कब्जा किया था। वैश्य समाज के दिलीप वार्ष्णेय की पत्नी लक्ष्मी गौतम को सपा से टिकट दिलाकर विधायक बनवा दिया था। हालांकि बाद में लक्ष्मी गौतम ने वैश्य परिवार से अपना नाता तोड़ लिया था। पालिका अध्यक्ष पद के लिए अनुसूचित जाति का आरक्षण लागू होने के बाद लक्ष्मी गौतम की तर्ज पर सियासी गणित के गुणाभाग की कवायद तेज होती दिख रही है। वैश्य समाज के ऐसे परिवार जिनके घरों में एससी वर्ग की महिलाएं हैं, राजनीतिक सफर के लिए दिग्गजों से संपर्क साधने शुरू कर दिए हैं। लक्ष्मी गौतम की नजीर दी जा रही है। आरक्षण के बावजूद पालिकाध्यक्ष पद वैश्य समाज के कब्जे में रहने की दुहाई दी जा रही है। वैश्य समाज से एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने का आह्वान किया जा रहा है। सक्रिय राजनीति में शामिल बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि...तो क्या एससी की सीट पर भी वैश्य समाज चुनौती देने को तैयार है? नगर में कई ऐसे परिवार हैं जिनके घर में अनुसूचित समाज की महिलाएं हैं। वैश्य बाहुल्य चंदौसी नगर में नगर निकाय के चुनाव के लिए ऐसे परिवार मुुख्य भूमिका में आ सकते हैं।