शेर पर सवार होकर आ जा शेरावालिए, शेरा वालिए...
चंदौसी।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां भगवती के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा अर्चना हुई। भोर से ही भक्तों की लंबी कतारों को नजारा दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने घर पर कलश की विधि विधान से शुभ मुहूर्त में स्थापना की। महिलाओं ने घर और मंदिरों में छंद गाकर माता का गुणगान किया।
शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा अर्चना का नजारा दिखाई दिया। भक्तों ने शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापना भी की। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की शक्तियां अनंत हैं। इस दिन उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योगसाधना का आरम्भ होता है। भगवती का वाहन वृषभ, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। शैलपुत्री के पूजन करने से %मूलाधार चक्र% जाग्रत होता है। जिससे अनेक प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। गुरुवार को पहले दिन भक्तों ने मां भगवती का आह्वान किया। भक्तों ने माता से भजनों के माध्यम से सिंहासन पर विराजने के लिए प्रार्थना की। शेर पर सवार होकर आजा शेरावालिए। आजा शेरावालिए, माता शेरावालिए। श्रद्घालुओं ने भोर से ही पूजा अर्चना की तैयारियां की। मंदिर पहुंचकर विधि विधान से मां का अभिषेक किया गया। सोलह श्रंगार कर भोग लगाया। हवन किए गए। प्रसाद वितरित किया गया। महिलाओं ने भजनों के माध्यम से घर और मंदिर में कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। देर शाम विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद भक्तों ने महाआरती की। माता का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण कर व्रत परायण किया।