रामपुर में 21 दिसंबर को हुए बवाल के 15 आरोपियों की जमानत शुक्रवार को सेशन कोर्ट में मंजूर हो गई। शुक्रवार को जमानत मंजूर होने के बाद आरोपियों की जेल से रिहाई सोमवार तक संभव है।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में 21 दिसंबर को रामपुर में बवाल हो गया था। उग्र भीड़ ने पथराव और आगजनी कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने तीन मुकदमे दर्ज किए थे, जिसमें लगभग 150 लोगों को नामजद किया गया था और हजारों अज्ञात को शामिल किया गया था।
इस मामले में पुलिस ने 34 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद उलमा और अन्य कई संगठनों के लोगों ने डीएम-एसपी को ज्ञापन देकर अवगत कराया कि बवाल के आरोप में बेकसूर लोगों को जेल भेज दिया गया है।
इस पर विचार करते हुए पुलिस ने 26 आरोपियों पर से 302, 307 और 395 की धारा हटा दी थी। इसके बाद इन 26 आरोपियों में से 15 ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत की अर्जी लगाई थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मोहम्मद जमीर रिजवी सहित चारों अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरोपियों को पुलिस ने झूठा फंसाया है।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने समर, अनस, रईस, रिजवान, अजहरूद्दीन, नासिर, अफरोज, शावेज, शाहरोज, जुनैद खां, शहनवाज, फईम, मोहम्मद आबिद, सगीर, हमजा की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
अधिवक्ता जमीर अहमद के मुताबिक कोर्ट ने सभी 15 आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जमानत होने के बाद इन सभी रिहाई सोमवार को होने की संभावना है क्योंकि शुक्रवार की शाम तक कोर्ट से परवाना जिला कारागर तक नहीं पहुंचा है। इसके बाद शनिवार और रविवार को अवकाश है। इस स्थिति में जमानत मिलने के बाद सभी 15 लोगों की जेल से रिहाई सोमवार को संभव है।