मीजल्स रुबेला (एमआर) टीकाकरण की रफ्तार तेज हो गई है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता टीमों के अभियान से विरोध करने वाले अभिभावक टीकाकरण के लिए हामी भरने लगे हैं। इसका सकारात्मक असर दिखने लगा है। शुक्रवार को जिले में 66.9 फीसदी टीकाकरण हुआ। इससे स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है।
जिले में 1196345 बच्चों का टीकाकरण होना है। शुरुआती दो सप्ताह तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों को स्कूलों में टीकाकरण करवाने में जद्दोजहद झेलनी पड़ी। अभिभावकों के विरोध करने से स्कूलों में प्रतिदिन औसत टीकाकरण 50 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ पाया। दो सप्ताह की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की अलग-अलग जागरूकता टीमें गठित की गई। मुस्लिम इलाकों में ही टीकाकरण का विरोध झेलना पड़ रहा है। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. डीके प्रेमी, और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. दीपक वर्मा और जिला समन्वयक डा. जावेद के नेतृत्व में टीमें मुस्लिम समुदाय के लोगों को टीकाकरण के फायदे गिनाए जा रहे हैं। विरोध करने वाले टीकाकरण के लिए राजी हो रहे हैं।
प्रशासन ने भी टीकाकरण में सहयोग नहीं करने वाले स्कूलों और मदरसों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू करवा दी है। इन प्रयासों से जिले में टीकाकरण में तेजी आई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के मुताबिक शुुक्रवार को स्कूलों और मदरसों में 66.9 फीसदी टीकाकरण हुआ। जो कि जिले के कुल लक्ष्य के सापेक्ष 34.2 फीसदी पहुंच गया है।
विरोध करने वाले अभिभावकों ने कहा, बच्चों को लगाओ टीका
मुरादाबाद। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को पीर गैब स्थित जन्नत निशा इंटर कालेज में जागरूकता कैंप लगाया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. दुर्गेश्वर प्रसाद ने टीकाकरण को लेकर अभिभावकों की भ्रांतियां दूर कीं। डा. प्रसाद ने विरोध करने वाले अभिभावकों को टीकाकरण का महत्व समझाया, जिसके बाद अभिभावक टीकाकरण करवाने राजी हो गए। डा. प्रसाद ने कहा कि टीका बच्चों को खसरा और रुबेला वायरस से बचाता है। नौ माह से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए टीका पूरी तरह सुरक्षित है। प्रधानाचार्य ने कहा कि शत प्रतिशत टीकाकरण कराने के लिए अभिभावकों को स्कूल स्तर पर जागरूक किया जाएगा। सभी अभिभावकों की बैठक बुलाई जाएगी। जिसमें सामूहिक रूप से टीकाकरण कराया जाएगा। इस दौरान मो जावेद, विजय सिंह, अरमान अली, हिमांशु, नसीम अहमद मौजूद रहे।