सीवर और पशु स्नान से रामगंगा की सांस घुट रही हैं। इनके चलते रामगंगा में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है। सीवर में आए कार्बनिक तत्व पानी की आक्सीजन को शोख लेते हैं। रामगंगा में घुलनशील आक्सीजन का स्तर सीवर का 90 एमएलडी पानी गिरने के बाद 12 से कम होकर तीन रह जाता है। यह रामगंगा के अस्तित्व के लिए संकट का दौर है। अभी तक रामगंगा में गिरते सीवरों को रोकने के एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं हो पाया है।
नदी की स्वच्छता व स्वास्थ्य उसमें घुलनशील आक्सीजन पर निर्भर करता है। प्रवाहित पानी में आक्सीजन की मात्रा 15से 20 मानक होनी चाहिए। सामान्तया नदियों में 12-15 के बीच आक्सीजन पाई जाती है। रामगंगा में कालागढ़ बांध तक घुलनशील आक्सीजन की मात्रा 14 है। उसके बाद महानगर में आने से पहले यह 10 से 12 मानक रह जाती है। महानगर में आते ही रामगंगा में सीवर और फैक्ट्रियों का अवशिष्ट डाला जाता है। नदी को सबसे ज्यादा नुकसान सीवर के गिरने, शवों के दाह संस्कार और पशुओं के स्नान से होता है। महानगर का 90 एमएलडी सीवर रामगंगा में 30 नालों से गिरता है। उसके बाद पानी में आक्सीजन की मात्रा 03 रह रही है। इससे रामगंगा का पानी स्नान करने के योग्य भी नहीं है। मानक के अनुसार पीने के पानी में आक्सीजन की मात्रा सात, मछलियों के लिए छह, स्नान करने के लिए पांच और जलीय पौधों के लिए पांच मानक होना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार 03 मानक आक्सीजन वाला पानी स्पर्श करने योग्य नहीं है। इससे नदी में भयंकर प्रदूषण हो गया है।
एनजीटी ने महानगर के सीवर यानी नालों को रामगंगा में गिरने से रोकने के आदेश दिए थे। उसके बाद सीवर डालने का काम शुरू किया गया है। अभी तक सीवर नालों के माध्यम से नदी में ही गिर रहा है। अभी जल्दी इसके रुकने की उम्मीद भी नहीं है।
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रामगंगा के लिए सबसे बउ़ा खतरा सीवर से है। इससे नदी में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है। रूह भयावह स्थिति है। हमको तत्काल सीवर को रोकना होगा। ऐसा न करने पर नदी का जीवन दायिनी वाला अस्तित्व विलुप्त हो जाएगा।
- बीएस राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक ।