घर-प्रतिष्ठान पर सबमर्सिबल लगाकर पानी की बर्बादी अब महंगी पड़ेगी। घटते भूजल स्तर से चिंतित सरकार अब ग्राउंड वाटर एक्ट लाने जा रही है। इसको दिसंबर तक लागू करने की तैयारी है। सरकार ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के एक्ट को मिलाकर अपने यहां लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सबमर्सिबल पर अलग से कर देना होगा। पानी की बर्बादी की तो कार्रवाई भी होगी। प्रदेश के पशुपालन व लघु सिंचाई मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बताया कि जागरूक न होने के अभाव में एक्ट लाना मजबूरी हो गया है। वह बुधवार को सर्किट हाउस में अमर उजाला से बात कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि लोग तीन पीढ़ी के लिए मकान, दुकान और कारोबार की तैयारी करते हैं, लेकिन हवा की गुणवत्ता और पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर नहीं हैं। यदि अभी से जागरूक नहंी हुए तो आने वाली पीढ़ियों को पानी नहीं मिल सकेगा। दो दशक से सरकार और सामाजिक संगठन जागरूकता अभियान चला रहे हैं, लेकिन लोगों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। प्रदेश में साल दर साल भूजल स्तर गिरता जा रहा है। विकास खंड क्रिटिकल से डार्क जोन में शामिल होते जा रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने ग्राउंड वाटर एक्ट लाने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की तर्ज पर इसको दिसंबर तक लागू करने की तैयारी है।
एक्ट में घरेलू सबमर्सिबल का कर तय किया जाएगा। इसको लगाने से पहले अनुमति लेनी होगी। सौ मीटर से बड़े प्रत्येक मकान पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना व चालू रखना अनिवार्य होगा। इसकी जांच को निकायों के कार्य में शामिल किया जाएगा। निकायों के चेयरमैन और महापौर को मजिस्ट्रेट पावर दी जाएंगी, जिससे पानी का दुरुपयोग करने पर ये जुर्माना लगा सकेंगे। बेवजह पानी बहाने पर जुर्माने के साथ ही सजा का प्रावधान किया जाएगा। इसके बिना काम चलने वाला नहीं है। फैक्ट्रियों, कारखानों, औद्योगिक व कामर्शियल प्रतिष्ठानों, कार सर्विस सेंटरों, होटलों और शीतल पेय बनाने वाली कंपनियों को ग्राउंड वाटर यूजर चार्ज देना होगा। इस कार्य में सभी के सहयोग की जरूरत है। उनके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।