मुरादाबाद। वैक्यूमपैन से निर्मित गुड़ व खांडसारी की विदेशों में अधिक मांग होने के कारण इस कारोबार को नया बाजार मिलने की संभावना है। इसलिए यहां के किसानों ने वायु का तीव्र दबाव उत्पन्न कर द्रव्य को शोषित कर एक कड़ाह से दूसरे में पहुंचाकर अति शोधित करने की प्रक्रिया वाले यंत्र (वैक्यूमपैन) का लाइसेंस दिलाने की मांग केंद्र सरकार से की है। गन्ना आयुक्त ने इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने का भरोसा दिया है।
सरकार की उपेक्षा के चलते गुड़ व खांडसारी उद्योग दम तोड़ रहा है। कुल गन्ना उत्पादन का 30 से 35 फीसदी गन्ना क्रेशरों में खरीदा जाता था। इस बार मात्र पांच फीसदी क्रेशर ही चल सके। इससे गन्ने का पूरा दबाव चीनी मिलों पर आ गया और तौल पर्ची को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा। अब गन्ना भुगतान को लेकर मारामारी मची है। चीनी के अधिक उत्पादन से बाजार में उसके दाम गिर गए थे। शासन ने गुड़ व खांडसारी कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की छूट दी है। इसको लाइसेंस मुक्त कर सभी टैक्स व जीएसटी से मुक्त कर दिया है और इनको लगाने की मिलों से दूरी को 15 किमी से घटाकर 08 किमी कर दी गई है।
गन्ना आयुक्त ने क्रेशर लगाने का आग्रह किया है। इससे मिलों पर गन्ने का दबाव कम हो जाएगा। इसके लिए किसानों ने वैक्यूमपैन का लाइसेंस देने की मांग की है। किसान नेता महेंद्र सिंह रंधावा ने बताया कि इससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। वैक्यूमपैन लगाने से प्रदूषण में 80 फीसदी की कमी आएगी और ईंधन की खपत 90 फीसदी कम हो जाएगी। यह प्रेशर कूकर की तरह काम करेगा। इससे गुड़ व खांडसारी की गुणवत्ता में सुधार होगा। ज्यादातर लोग इसका प्रयोग खांडसारी कारोबार में करते हैं। उससे सल्फर का रंग पीलेपन की बजाय सफेद होगा और अच्छे दाम भी मिलेंगे। किसान नेता डा. नौ सिंह, महेंद्र सिंह आदि ने मांग की है कि क्रेशरों के वैक्यूम पैन का लाइसेंस फ्री किया जाए या केंद्र से लाइसेंस दिलाया जाए।
यह उद्योग की श्रेणी में आता है। वैक्यूमपैन का लाइसेंस केंद्र सरकार से जारी होता है। गन्ना आयुक्त ने इसके लिए प्रस्ताव भेजने का भरोसा दिया है। निर्णय भारत सरकार को लेना है।
- राजेश मिश्रा, उप गन्ना आयुक्त।