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नदियों में गंदा पानी बहाया तो जुर्माना

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मुरादाबाद।
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अगले महीने महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को स्नान के लिए साफ जल उपलब्ध कराने के लिए एनजीटी ने एक और आदेश जारी किया है। जिसमें कहा है कि पश्चिमी यूपी की चीनी मिल और औद्योगिक इकाइयों का दूषित जल नदियों में डाला गया तो 50 हजार रुपये प्रतिदिन जुर्माना अदा करना होगा। इस जुर्माने को वसूलने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई है।
शहर के नालों और सीवेज का दूषित जल नदियों में गिराया तो नगर निगम और जल निगम के खिलाफ प्रदेश सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। सरकारी संस्थाओं और औद्योगिक इकाइयों को कई साल पहले एसटीपी प्लांट लगाकर ही अपने यहां के पानी को नदियों में डालने के आदेश किए थे। इस आदेश का अधिकांश संस्थाओं तथा औद्योगिक इकाइयों ने अमल नहीं किया है। इन दिनों महाकुंभ में श्रद्धालुओं को साफ जल की बात आई तो एनजीटी ने इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक आर के सिंह ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर पश्चिमी यूपी की चीनी मिलों और औद्योगिक इकाइयों में सीसी टीवी कैमरे तथा अलार्म सिस्टम लगा दिया गया है। जिसकी क्षेत्रीय कार्यालय केसाथ - साथ प्रदेश स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिलाधिकारी कार्यालय में प्रतिदिन समीक्षा होगी। नदियों में किसी भी औद्योगिक इकाई का दूषित जल गिरा तो कंट्रोल रूप में स्वत: ही अलार्म बज जाएगा। उसी के आधार पर 50 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना अदा करना होगा।
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क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि 15 दिसंबर से मुरादाबाद की नदियों के आधा दर्जन प्वाइंट पर औद्योगिक इकाइयों तथा चीनी मिलों के गिरने वाले जल के परीक्षण की व्यवस्था कर ली गई है। यदि दूषित जल मिला तो 24 घंटे केअंदर नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
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