मीजल्स-रूबेला कांजीनेटल रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) बीमारियों पर 2020 तक नियंत्रण हो जाएगा। इसके लिए 15 साल की उम्र तक के सभी बच्चों को मीजल्स रूबेला (एमआर) के टीके लगाए जाएंगे। 26 नवंबर से टीकाकरण का अभियान शुरू हो जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय कर टीकाकरण का माइक्रो प्लान तैयार कर लिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनीता अग्निहोत्री ने यह जानकारी दी।
अभियान की तैयारियों की जानकारी देते हुए सीएमओ ने कहा कि जिले में 1196345 बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। पहले दो हफ्तों में जिले के 3250 प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल, 430 इंटर कालेज और 980 मदरसों में टीकाकरण होगा। स्कूलों प्रधानाचार्यों एवं मदरसों प्रबंधकों, नोडल अधिकारियों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा वर्कर, पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पांच सप्ताह के अभियान में दो सप्ताह आबादी क्षेत्रों और आखिरी एक सप्ताह छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण होगा। उन्होंने कहा कि खसरा रूबेला के अधिकतर मामले नौ माह से 15 साल की उम्र के बच्चों में पाए जाते हैं। किसी बच्चे ने पूर्व में खसरा का टीका लगाया है तो उसे भी एमआर का टीका लगाया जाएगा। नोडल अधिकारी डा. दीपक वर्मा ने कहा कि शत प्रतिशत टीकाकरण जागरूकता के लिए ग्राम प्रधानों, सभासदों, पार्षदों, स्वयंसेवी संस्थाओं और राशन डीलरों का सहयोग लिया जाएगा। इस दौरान अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. दिनेश कुमार प्रेमी, डा. रणवीर सिंह, डा. जावेद, डब्ल्यूएचओ की डा. संजीदा नूर, डा. जिनीडा अटलांटा नेवी मौजूद रही।
स्वयंसेवी संस्थाएं करेंगी सहयोग
यूनिसेफ, रोटरी इंटरनेशनल, यूएनडीपी, जेएसआई इंडिया, विश्व स्वास्थ्य संगठन, बाल विकास विभाग एमआर अभियान में लोगों को जागरूक करेगा। जिन इलाकों में अभियान चलेगा एक दिन पूर्व वहां के लोगों को सूचना दी जाएगी। आंगनबाड़ी और आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण कराने में मदद करेंगी।