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बारिश ने प्रभावित की कुंदरकी से आम की सप्लाई

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कुंदरकी (मुरादाबाद)। फसलाें का राजा कहलाएं जाने वाले आम की फसल को लेकर कुंदरकी का नाम भी चर्चित है। यहां से देश-विदेश के लिए आम की सप्लाई हर वर्ष होती है। फसल की बेहतर पैैदावार से बाग स्वामियों को उचित दाम नहीं मिलने वह परेशान है, जिसकी वजह बारिश की देरी ही डिमांड न होना बताया जा रहा है।
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गौरतलब है कि मुरादाबाद जिले के कुंदरकी इलाके में काफी संख्या में आम के बाग है। यहां के आम की डिमांड देश ही बल्कि पड़ोसी विदेशों मेें होती है। हर वर्ष कुंदरकी सेे चौसा, दशहरी, फजरी, लंगड़ा आम की सप्लाई होती है। खास बात यह है कि यहा बाग स्वामियाें को खुद लेकर नहीं जाना पड़ता है बल्कि आम के बड़े व्यापारी खुद कुंदरकी आकर खरीदने के बाद बागों से पेटियां को रखने के बाद ट्रकों में लादकर कच्चा आम को ले जाते है। चौसा आम को बांग्लादेश-नेपाल भी जाता है वहीं लंगड़ा, फजरी और दशहरी की डिमांड मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, रांची, जयपुर, वाराणसी, आगरा आदि बड़े शहरों को हर वर्ष होती है जबकि देशी आम की डिमांड जयपुर के लिए अधिक रहती है।
बाग स्वामी शद्दन शाह, हफीज अहमद, मेहंदी हसन, बाबू कुरैशी आदि का कहना था कि फसल की पैदावार तो औसत है लेकिन बारिश में देरी होने से आम की डिमांड देश-विदेश के बड़े शहरों को न होने की वजह से भाव नहीं मिल पा रहा है। भीषण गर्मी के चलते पेड़ की डालों पर ही आम पक कर गिर रहा है, जोकि मात्र 15-20 रुपये किलो ही बामुश्किल बिक पा रहा है। अगर कुछ दिन में बाहर के व्यापारी नहीं आया तो पेड़ों पर आम पक जाएगा। जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है, वहीं बारिश हो जाती है, तो आम के डिमांड तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। जिसके बाद देश-विदेश के बड़े शहरों को कुंदरकी से आम की सप्लाई शुरू जाएगी।
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आम तो पका है लेकिन स्वाद है फीका
कुंदरकी। गर्मी के प्रकोप से पेड़ों पर आम तो पक रहा है लेकिन बारिश न होने की वजह से आम के अंदर मिठास कम है और उसका स्वाद में परिवर्तन है जिसके चलते आम की खरीद पर असर पड़ रहा है। आम के शौकीनों का कहना है कि बारिश होने के बाद आम के खाने का सही समय होता है। बारिश से आम के अंदर की गर्मी से निकल जाती है और उसमें मिठास और स्वाद दोनों ही मिले है। साथ ही आम नुकसान भी कम ही देता है।
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