रमजान का पाक माह गरीबों की मदद का है। इसमें खुदा की इबादत के साथ ही लोगों की परेशानी दूर करने और दूसरों के काम आने की पहल की जानी चाहिए। यह विचार सिया जामा मस्जिद के इमाम जुमा मौलाना डा. शहवार हुसैन ने व्यक्त किए। वह युवाओं से रोजा रखने और अल्लाह की राह में लगने का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि रमजान दूसरों के काम आने की सींख देता है। इसकेचलते रोजा रखने में फख्र्र महसूस करें और दूसरों को रोजा रखने को बढ़ावा दें। यह इबादत का माह होने से सभी पर फर्ज है। रोजेदार को ध्यान में रखना चाहिए कि कोई ऐसा काम न किया जाए, जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे। इस महीने में कुरआन मजीद नाजिर हुआ, इसलिए सबाब कमाने का इससे अच्छा मौका मिलने वाला नहीं है। गरीबों से हमदर्दी रखी जाए और मजबूरों से सहानुभूति दिखाई जाए। ऐसा कोई काम न करें, जिससे अल्लाह नाराज हो। गुनाहों से तौबा करें। जेल रोड वाली मस्जिद में रविवार को कुरआन मुकम्मल हो गया। इसको हाफिज मुदस्सिर ने रोजाना तीन पारे पढ़कर पूरा कराया। इसके सामा हाफिी शकील रहे। इस मौके पर मौलाना अब्दुल रहीम ने बयान फरमाया।
रमजान में बाजार में सबसे ज्यादा जोर खजूर की खरीद पर है। खजूर से रोजे का इफ्तार करने की परंपरा है। रोजा इफ्तारी में खजूर का प्रयोग पाक माना जाता है। शाम को इफ्तार की तैयारी की गई। मस्जिदों के साथ ही लोगों ने अपने यहां पर भी इफ्तार का बंदोबस्त कराया। इफ्तार में बर्फ के पानी, शिकंजी, लस्सी और ठंडी चीजों की भरमार रही। रमजान के चलते मस्जिदों के आसपास और मुस्लिम बस्तियों में खास तौर पर सफाई कराई जा रही है। कूड़े का उठान कराने के साथ ही चूना डलवाया जा रहा है।