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गिरफ्तार फैसल ने किया खुलासा ः दस लाख के नकली नोट खपा चुके हैं तस्कर

Mon, 06 Mar 2017 02:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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fake currency
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नकली नोटों की तस्करी के मामले में पकड़ा गया फैसल अब तक पुलिस रिकॉर्ड में महज एक शातिर वाहन चोर है। जिसके खिलाफ ऊधमसिंह नगर और दिल्ली के कई थानों में बाइक चोरी के चार मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी ने पुलिस हिरासत में खुलासा किया है कि नोटबंदी के दौरान जब उसकी चोरी की बाइकें नहीं बिकीं तो वह नकली नोट की तस्करी करने लगा।
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ये गैंग मुरादाबाद मंडल समेत कई जिलों में दस लाख के जाली नोट खपा चुका है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फैसल ने बताया कि वाहन चोरी के धंधे से जुडे़ होने के दौरान उसकी मुलाकात करूला के जाकिर से हुई थी। जाकिर ने ही उसे नकली नोटों की तस्करी के  धंधे से जोड़ा।

नोटबंदी के दौरान नोटों की तंगी थी। पब्लिक नए नोटों के लिए परेशान थी। इस मौके का फायदा उठाकर मुरादाबाद, रामपुर, गािजयाबाद, दिल्ली, नोएडा, ऊधमसिंह नगर सहित कई अन्य जगहों पर आरोपियों ने अब तक दस लाख रुपये के नकली नोट चलाए हैं।
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इसके लिए आरोपियों ने लोकल जिलों में भी अपने एजेंट तैयार कर रखे थे, जो इन नोटों को मार्केट में चलवाते थे। दूसरी वजह ये भीथी कि नोटबंदी के वक्त नए नोटों की किल्लत होने की वजह से चोरी की वाहनों की बिक्री में कमी आ गई थी।

इस वजह से उसने नकली नोट के धंधे में उतरने का फैसला किया था। उधर रविवार क फैसल की पत्नी थाने पहुंची। दो साल पहले ही उसने लव मैरिज की थी। पत्नी ने बताया कि शादी के बाद फैसल वाहन चोरी के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त उसने फैसल से ये धंधा छोड़ने के लिए कहा था।  नकली नोट: न कागज न तार, फिर भी चल रहा ‘कारोबार’ नकली नोटों के तस्करों को नोटों की छपाई के लिए असली नोट में यूज किया जाने वाला विशेष श्रेणी का कागज नहीं मिल रहा है। आरोपियों के पास नोटों में इस्तेमाल होने वाला तार भी नहीं है। इस वजह से वह असली नोटों को स्कैन कर नकली नोट तैयार कर रहे हैं। असली नोटों की फोटोकॉपी को ही वह मार्केट में धड़ल्ले से चला रहे हैं।
 
तस्कर फैसल को गिरफ्तार करने वाले गाजियाबाद पुलिस की टीम को लीड कर रहे एसआई माहिर ने बताया कि आरोपियों से बरामद नकली नोटाें में तार नहीं लगे हैं। आरोपियों से दो दो हजार के 65 नोट (एक लाख तीस हजार) बरामद हुए हैं।

यह नोट असली नोटों की फोटोकॉपी है, जिन्हें स्कैन कर साधारण कागज पर ही तैयार किया गया है। फैसल ने बताया कि जाकिर को यह नकली नोट नेपाल का गैंग मुहैया कराता था। इसके  बाद वह लोग इन नोटों को टुकड़ों में मार्केट में चला देते थे।

उन्होंने बताया कि नकली नोटों की पहचान करना बहुत आसान है। इस नोट को हाथ में आने पर जरा सा गौर करने पर ही पता चल जाएगा कि नोट में तार नहीं है, इसके अलावा नोट का कागज भी साधारण कागज की तरह है जो नकली नोट की पोल खोल देता है। 
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