मुरादाबाद। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के नाम पर सरकारी योजनाओं में सिर्फ खानापूर्ति होती दिख रही है। जिला उद्योग केंद्र की ओर से जनवरी में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 450 युवाओं को पांच महीने बाद भी टूल किट नहीं दी गई।
इसके साथ ही 40 युवाओं के खातों में अब तक दो-दो हजार रुपये की सहायता राशि भी नहीं पहुंची। दूसरी ओर हर साल युवाओं को सिर्फ 10 दिन की ट्रेनिंग देकर हुनरमंद बनाने का दावा किया जा रहा है, जबकि प्रशिक्षकों का कहना है कि किसी भी हस्तशिल्प कारीगरी को सीखने के लिए कम से कम छह महीने का प्रशिक्षण जरूरी होता है।
शहर के बरबालान, नवाबपुरा, गुइयां बाग, अंसारी चौक समेत अन्य स्थानों पर कारखानों में सीएनसी जैसी मशीनों का इस्तेमाल बढ़ चुका है। इसके बावजूद युवाओं को कारीगर बनाने के लिए जिला उद्योग केंद्र की ट्रेनिंग अब भी पुरानी तकनीकों तक सीमित हैं। ऐसे में युवाओं को रोजगार की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक कौशल नहीं मिल पा रहा है।
प्रशिक्षण ले चुके युवाओं का कहना है कि महज 10 दिन की ट्रेनिंग में सिर्फ औपचारिक जानकारी दी जाती है। इससे काम की बारीकियों को समझना मुश्किल होता है। प्रशिक्षक मोहम्मद इकराम का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को नई तकनीक व आधुनिक मशीनों के हिसाब से अपडेट नहीं किया गया तो युवाओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
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मैंने भी डीआईसी की ट्रेनिंग की है। इसमें कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई। यह केवल सर्टिफिकेट तक सीमित रहती है। क्योंकि 10 दिन में हस्तशिल्प से जुड़ा तकनीकी काम सीखना संभव नहीं है।
-राशिद अली, कारीगर
यह ट्रेनिंग कम से कम छह महीने की होनी चाहिए। जो लोग हस्तशिल्प से जुड़े काम कर रहे हैं। वह ट्रेनिंग लेते हैं तो उनका सर्टिफिकेट बन जाता है। नए युवाओं को कोई खास तकनीकी जानकारी नहीं मिल पाती। जनवरी 2026 में ट्रेनिंग ले चुके युवाओं को अभी तक टूल किट नहीं मिली है।
-मोहम्मद इकराम, प्रशिक्षक
जनवरी में प्रशिक्षण ले चुके युवाओं को जुलाई के पहले सप्ताह में टूल किट दी जाएगी। बैंकिंग दस्तावेज की समस्या से कुछ युवाओं की सहायता राशि रुकी है। दोबारा रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
-दीपेंद्र कुमार, उपायुक्त, डीआईसी