ललही छठ त्यौहार को देखते हुए शनिवार को बाजारों में महिलाओं की खरीदारों का तांता लगा रहा। महिलाएं पुत्र की दीर्घायु की पूजा के लिए सामानों की खरीदारी करने में जुटी रहीं।
नगर के मुकेरी बाजार, बसनई बाजार, संगमोहाल,कचहरी, गुड़हट्टी और त्रिमोहानी पर ललही छठ की पूर्व संध्या पर पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत पर खरीदारी करने वाली महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान फलों और खिलौनों की दूकानों पर नगर क्षेत्र व ग्रामीणांचलों से आई महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। आज के दिन व्रती महिलाएं मिट्टी के पात्र में भिगोया हुआ महुआ, तिन्नी का चावल, कटा नारियल, केला, अमरूद,दही आदि थाल में रख कर सुबह के समय आस पास की महिलाओं के एक साथ होकर निश्चित स्थान पर जाकर कथा सुनती और सुनाती हैं। इस दौरान पूजा स्थल महिलाओं की भीड़ व बच्चों की किलकारियों से गूंजता रहता है, और दूकानें मिट्टी के बने खिलौनों से सजी रहती हैं। पूजा में महिलाएं अपने पुत्र की लंबी उम्र की दुआएं मांगती हैं। व्रत के दिन महिलाएं पूरे दिन फलाहार करती हैं। इस पूजा में भैंस के दूध, दही एवं घी का प्रयोग होता है।
भविष्य पुराण में हलखष्ठी व्रत का महात्म बताया गया है। ज्योतिषाचार्य पं.रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि भविष्य पुराण में वर्णित है कि एक राजा का पुत्र उसकी दासी के साथ नदी में स्नान करने गया था। स्नान के दौरान राजा के पुत्र की नदी में डूबने से मृत्यु हो गई। पुत्र के मौत पर क्रोधित राजा ने दासी के पुत्र को अग्नि में जला दिया। दासी डर कर वह जंगल में भाग गई, जहां उसकी मुलाकात दुर्वाषा ऋषि से होती है। दासी की पीड़ा सुन कर दुर्वाषा ऋषि ने उसे ललही छठ व्रत के बारे में बताया, जिसे करने से उसका पुत्र जीवित हो गया। दासी ने राजा की पत्नी को भी ललही छठ व्रत करने को कहा, जिससे राजा का पुत्र भी जीवित हो गया तभी से व्रत की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि पूजा का शुभ मुहूर्त मध्याह्न में होता है।