मिर्जापुर। महिलाओं को भी महिलाओं के प्रति अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए। पुरुष तो महिलाओं को दबाने का प्रयास करता ही है, लेकिन महिलाएं भी महिलाओं की दुश्मन साबित होती हैं। ये बातें मंगलवार को सुंदरघाट स्थित डॉल्फिन पब्लिक स्कूल में आयोजित अमर उजाला 100 मिलियन स्माइल्स जागरूकता संवाद में वक्ताओं ने कहा।
संवाद में महिलाओं ने कहा कि महिलाएं किसी सहारे की मोहताज नहीं हैं। जब भी अवसर मिला है, उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। चाहे घर की रसोई हो या युद्ध का मैदान। वक्ताओं ने कहा कि लड़कों से कभी यह नहीं पूछा जाता कि वे कहां जा रहे हैं। रात में कहां से आ रहे हैं। यह प्रश्न केवल लड़कियों से किया जाता है। यदि लड़कों पर भी ऐसी ही बंदिशें लगाई जाएं, तो अपराध काफी हद तक कम हो सकता है।
महिलाओं ने कहा कि नारी को अबला नहीं समझना चाहिए और न कहा जाना चाहिए। यदि कुछ बदलना है, तो अपनी मानसिकता को बदलें। महिलाएं देश की प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति बनकर देश को दिशा दे रही हैं तो युद्धक्षेत्र में अपनी युद्धकला के कौशल का भी प्रदर्शन कर रही हैं। हवाई जहाज उड़ाने, टैंक चलाने में भी महिलाएं सक्षम हैं। इस मौके पर हर्षिता जायसवाल, सिया कसेरा, सुनीता गुप्ता, प्रिंसी केसरी, इशिका, कहकशां खानम, दीक्षा यादव, शमीम बानो, मानसी गुप्ता, मुस्कान सिंह, मान्या केसरी आदि थीं।