नगर के एक कालोनी में निर्माणाधीन भवन, स्रोत संवाद
मिर्जापुर। शहर में बीते कुछ सालों में तेजी से अवैध कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। न तो इनका नक्शा पास है न ही यहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जिला प्रशासन के एक सर्वे के मुताबिक जिले में अवैध कॉलोनियों की संख्या लगभग 200 के आसपास है। लोग दलालों के माध्यम से मंहगे दामों पर भूखंड खरीदकर भवन का निर्माण करा रहे हैं। इस पर न तो विकास प्राधिकरण आपत्ति और न ही जिला प्रशासन की ओर से आपत्ति जताई जाती है।
नहीं मिलती हैं सुविधाएं तो प्रशासन को कोसती है जनता
आवास विकास परिषद की ओर से बनाई गई आवास विकास कॉलोनी और विंध्याचल में एक निजी कॉलोनाइजर की ओर से कॉलोनी विकसित की गई है।
इसके अलावा भरुहना, बसही, विंध्याचल का बाहरी क्षेत्र, लोहिया तालाब सहित अन्य स्थानों पर पहले कृषि भूमि थी।
जिसे भू-माफिया किसानों से सस्ते दामों में सौदा तय करके वहां पर अवैध कॉलोनी बसा दिए। जहां मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। अब वहां रह रहे लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। तो लोग उसका दोषारोपण नगर पालिका व अन्य विभागों को करते हैं।