कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. रीता बहुगुणा जोशी ने शनिवार को कहा कि देश की जनता महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी से जूझ रही है। इसे दूर करने के बजाय प्रधानमंत्री विदेश में सेल्फी लेने में व्यस्त हैं।
भाजपा शासित राज्यों में व्यापम समेत अन्य घोटाले में फंसे आरोपियों तथा उसका खुलासा करने वाले लोगों की हत्या की जा रही है।
विदेश मंत्री ललित मोदी का साथ दे रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हैं। नगर के फतहां स्थित सिंचाई डाक बंगला में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर प्रधानमंत्री कब अपना मौन तोड़ेंगे? जनता उनसे हर सवाल का जवाब मांग रही है।
जोशी ने कहा कि बिहार में कांग्रेस जनता परिवार के साथ समझौता कर चुनाव लड़ेगी। प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। पत्रकार, व्यापारियों की हत्या की जा रही है।
पुलिस सरकार के इशारे पर काम कर रही है। लोगों का पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा अधिकांश किसानों को नहीं मिला।
जिन स्थानों पर प्रदेश एवं केंद्र सरकार के मंत्री, सांसद तथा विधायक हैं, वहां कुछ फीसदी किसानों को मुआवजा दिया गया है। अच्छे दिन लाने की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों का हित नहीं, अहित का काम कर रहे हैं। इसमें भूमि अधिग्रहण बिल भी शामिल है।
पीएम अपने संसदीय सीट वाराणसी में बर्बाद फसलों का जायजा लेने नहीं पहुंच सके। चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि किसानों को उनकी फसलों का बढ़ा दाम दिया जाएगा, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ। कहा कि कांग्रेस की सरकार में कच्चा तेल महंगा था।
रसोई गैस की कीमतें भी बढ़ी थीं। इसके बावजूद यूपीए सरकार जनता को सब्सिडी देती रही। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद कच्चे तेल की कीमत में काफी गिरावट आई, लेकिन सरकार ने लोगों को इसका लाभ नहीं दिया। दाल, सब्जी और सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं।
इस सरकार ने केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया है। अडानी, अंबानी समेत अन्य पूंजीपति सरकार के खर्च पर विदेश घूम रहे हैं। 90 दिन के अंदर कालाधन लाने का दावा कर रहे पीएम 14 महीने बाद भी एक रुपया नहीं ला सके।
पीएम की कथनी और करनी में साफ अंतर दिखने लगा है। सैनिकों के वन रैंक, वन पेंशन का वादा करने के बाद भी मामला लटका है।
इस दौरान जिलाध्यक्ष गिरीश तिवारी, अमिताभ पांडेय, कंचन पांडेय, अर्चना चौबे, राजधर दूबे, छोटे खान, माता प्रसाद दूबे, राजन पाठक, भारतेंदु, जुबैदा खातून रहे।