मिर्जापुर। रविवार को सुबह मौसम भले ही साफ रहा। कुछ देर बाद आसमान में उठे बादल देख किसानों के होश उड़ गए। बर्फीली हवाओं से लोग बेहाल रहे। दिन भर बादलों के बीच भगवान भाष्कर का लुका छिपी का दौर चलता रहा। पूरे दिन लोग ठंड से कांपते रहे। जहां कई अलाव के सामने बैठे रहे वहीं पूरे बदन का ढकने के बाद ही लोग घरों से बाहर निकलना मुनासिब समझ रहे थे।
कड़ाके के ठंड के बीच खुले वाहनों पर लोगों का यात्रा करना दुष्कर रहा। बदन भेदती हवाओं से लोग ठिठुरते रहे। पशु-पक्षी बेहाल रहे। जहां भी अलाव दिखा मवेशी के साथ ही अन्य जीव आसपास कुंडली मारे बैठे रहे। गलन और ठिठुरन के बीच रेलवे स्टेशन और बस स्टैंडो पर यात्रि ठिठुरते रहे। बसों में जीर्ण-शीर्ण व अध खुले खिड़कियों के आगे बैठे यात्री परेशान रहे। बर्फीली हवाएं शरीर में कांटो सरीखे चुभ रहे थे। रेलवे और बस स्टेशन परिसर व आसपास अलाव की समुचित व्यवस्था न होने से यात्री समेत राहगीर परेशान रहे। पिछले दिनों हुई बूंदाबादी से किसान उबर नहीं पाए कि एकबार फिर से आसमान में उठे बादलों को लेकर किसान चिंतित रहे। किसानों का मानना है कि यदि फिर से बारिश हुई तो कहीं के नहीं रहेंगे।
-मौसम को देखते हुए किसान भाई गेहूं के फसलों की भराई करें। यदि पूर्व में भराई हो गई हो उसमें यूरिया के साथ ही जिंक आदि डालें जिससे फसल पीली न होने पाए।
- पीके प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी।